जोकर को ठोकर
जितना खर्चा इस बिहार में सारे नेता झोंक रहे हैं
गली, मुहल्ले चौबारो में कुत्ते जैसे भौंक रहे हैं
जांति-पांति के आरक्षण से दाल सियासी छौंक रहे हैं
इनके जुमलो को सुनकर तो नंगे भी अब चौंक रहे हैं
रहने को घर-बार नही है सबको टी. वी. बाँट रहे हैं
स्कूटी और लैपटाप से घर - घर नंगे छाँट रहे है
जिसके मूँह में जो आता हेै,अपने ढंग से बोल रहा है
फर्जी छापे मरवा करके ,प्रजातन्त्र को तोल रहा है
मंहगायी और बे-रोजगारी का नेता को ख्याल नही हेै
राशन से चावल मिलता है,थाली में अब दाल नही है
नवरात्र में सब कुछ नकली,दुर्गा माँ पर चढा रहे हैं
सारे नेता क्यों बिहार को इतने आगे बढा रहे हैं
अगर चुनावी सारा खर्चा इस बिहार पर लग जाता है
अगडे पिछडे,उँच नीच का भेद स्वयं ही मिट जाता है
खुशहाली वरदान नही है,स्वयं सडक पर दिख जायेंगी
राजनीति की औकातें फिर , प्रजातन्त्र कैसे गायेगी
राजनीति में अगडा - पिछडा, नंगा - भूखा सौगाते हेैं
इसिलिये तो नंगे - भूखे राजनीति में ही आते है
दुर्भाग्य है, भोली जनता नंगो से अनजान रही है
यही कारण है,आज समस्या राजनीति पहचान रही है
भारत में जितने नेता है, उन सबका इतिहास उठाओ
सबकी औकातो को ढूंढो,चुन-चुन कर सडकों पर लाओ
कैसे अरब पति बनते हैं, सारी जनता जान जायेगी
जिस जनता को लूट रहे हैं,वो जनता इनको खायेगी
थोडी हिम्मत करनी होगी,अगर राष्ट्र के रखवाले हो
वोटर हो, कमजोर नही हो, जनमत के बर्छी, भाले हो
अगर किसी में हिम्मत हो तो नेता की औकात टटोलो
कवि आग ये प्रजातन्त्र है, हर नेता का किस्सा खोलो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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