Thursday, October 15, 2015

आचरण-हरण
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया
कोइ चमचा चरण पकड़ ले तो समझो वो खास हो गया
सुबह - सुबह लगती है लाइन चरण पकडने वालों की
चरणों से जो चूक गये बस खैर नही उन सालों की
जिन चमचों की मरी आत्मा,उनको ये आभाश हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया

आइएएस और आइपीएस अधिकारी इसके चरण दबाऐं
बुद्धि- बल्लभ,वाणी-भूषण, इनसे भीख माॅंग कर खायें
लावारिस उद्योगपति भी , इन पर धन वर्षा करते है
चोर उचक्के, डाकू इनके दर्शन को तरसा करते है
राष्ट्र-नियन्ता तस्कर देखो, आज परीक्षा पास हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया

लहु -लूहान कर भारत माता के टुकडे़ ये काट रहे है
मांस ,मदिरा ,वैष्यागामी शहर , गाॅंव को बांट रहे है
ये बने सरगना , मंत्री , संत्री छोटे - छोटे भागों से
बुन जाते हैे मकड़ी जाले, सढे़ हुये इन धागों से
अब तो चेहरा,चाल, चरित, व्यभिचारी अय्यास होगया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया

इनके पग-चिन्हों पर बाबा , नंग, लंगोटी भी चलती है
धर्म-कर्म और ध्यान,धारणा राजनीति से ही पलती है
सत्ता और सियासी रण में सन्यासी को देख रहा हॅूं
बाबा जी के चौरासी आसन से नजरें सेंक रहा हॅूं
दूरदृष्टि का चिन्तन - मन्थन, ‘ भारत’ सूरदास हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास होगया

भारत माता की छाती में राजनीति के लाख धडे़ हैं
सबके चरण पकडने वाले व्यभिचारी तैयार खडे है
मात, पिता के तृष्कारी को इनके चरण दबाते पाया
प्रजातंत्र में व्यभिचार ने संस्कारों को कैसे खाया
इस राजनीति की नगर - वधू से भारत देवदास होगया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया

चौबीस घण्टे चरने वाले बापू के गाने गाते हैं
सदाचार के आॅंख,कान,मुॅंह बंद किये सब कुछ खाते हैं
इनके हर धन्धे के पीछे नौकर शाही सहयोगी है
ये! साॅंड फल फूल रहे हैं जनता शदियों से रोगी है
राजनीति का सबसे सस्ता धन्घा ये अब खास होगया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया

प्रतिभाओं को पुरूष्कार भी इनकी कृपा से मिलते हैं
भारत में साहित्यकार भी, इनके हिलने से हिलते हैं
बुद्धि बल्लभ इनके उपर उपन्यास लिखते जाते हैं
वाणी - भूषण कवि आग की कविताओं से शर्माते हैं
सच्चायी की प्रतिभाओं का देखो क्या उपहास हो गया
नेता जी को नमस्कार ना करो तो समझो नास हो गया!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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