मै राजनीति हूँ
मै राजनीति हूँ भारत को खंगाल रही हूँ
सात दशक से चोर उचक्के पाल रही हूँ
बडे - बडे उद्योग घरानो को पनपाया
हर डाकू पर मेहरबान है मेरी छाया
मैं मूल वृक्ष की जडोे में मट्ठा डाल रही हूँ
मैं राजनीति हू भारत को खगाल रही हूँ
सारे चैनल चरण सियासी चूम रहे हैं
सब मस्ती में देश - विदेश में घूम रहे हैं
छोटे - मोटे पत्रकार भी पाल रही हूँ
अपने ढंग से सभी नमूने ढाल रही हूँ
तडक भडक की खबरो में जजाल रही हूँ
मैं राजनीति हूँ भारत को खगाल रही हूँ
मैं राष्ट्र के टुकडे - टुकडे काट रही हूँ
धर्म, मजहब मे कौम कबीले बाँट रही हूँ
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख ,इसाई मेरे अंग हैं
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण अंग - भंग हैं
आदि काल से छल,कपटाें की जाल रही हूँ
मैं राजनीति हूँ भारत को खगाल रही हूँ
मै राष्ट्र द्रोह के कीट - पतगे पनपाती हूँ
मैं योग-भ्रष्ट साधू - सन्यासी की ख्याती हूँ
पण्डित, मुल्ला, योगी की मैं कर्णधार हूँ
सबके अन्दर छिपी हुयी मैं व्यभिचाार हूँ
आडम्बर में छिपी धर्म की खाल रही हूँ
मैं राजनीति हूँ भारत को खंगाल रही हूँ
मैं राजनीति में लंच ,मंच, प्रपञ्च रही हूँ
भ्रष्ट व्यवस्था में हर दम सरपंच रही हूँ
अश्लील शब्द मैं हर मंचो से फेंक रही हूँ
मैं तटस्त हूँ, हर डाकू को देख रही हूँ
शब्दो के सौदागर में मैं बक्काल रही हूँ
मैं राजनीति हूँ भारत को खंगाल रही हूँ
मैं भाषण से सबका सब कुछ बाँट रही हूँ
राजनीति का जहर फैलाकर काट रही हूँ
ये डेढ अरब की भीडें मुझ पर ही जिन्दा हैं
अब मेरा भारत मेरे कारण शर्मिन्दा है
मैं आग की कलम में जलती ज्वाल रही हू
मैं राजनीति हू भारत को खंगाल रही हूँ ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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