भेद का खेद
मैं हूँ हिन्दू,मैं हूँ मुूस्लिम, पिछडा सिक्ख इसाई
भारत का मुर्गा, बकरा, हूँ काटें खटिक कसाई
कोई काटे ईद मनाकर, कोई नव-रात्र मनाके
हम बकरे इस देश के मालिक कटते रहे अभागे
सात दशक से नेता हमको मूँड रहे हैं नाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुूस्लिम,पिछडा सिक्ख इसाई
आरक्षण की कास्ट, फास्ट है दौड रहे हैं घोडेे
नेता सबको हाँक रहे हैं मार - मार कर कोडे
सबके अपने - अपने प्रतिशत ठोक रहे हैं दावे
संविधान के राष्ट्रगीत को सभी सियासी गावें
सारी जनता बंटी हुयी है, चारों ओर तवाही
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुूस्लिम,पिछडा सिक्ख इसाई
छोटे - मोटे इन डबरो में सडा राष्ट्र का पानी
हर मजहब में पडे हैं कीडे, धर्म,कर्म के ज्ञानी
कंही मौलवी, पण्डित बाबा चीख-चीख चिल्लावें
सब अपने-अपने त्यौहारो में अपना गाना गावें
इस राजनीति में सारे दुश्मन बन जाते है भाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुूस्लिम,पिछडा सिक्ख इसाई
आरएसएस की हिन्दी शिक्षा,मुस्लिम पढें मदरसे
इसाई की अंग्रेजी है, संस्कृत सडक में तरसे
जगह -जगह भांषा बोली की खिंची पढी तलवारें
मैं आग बरसती देख रहा हूँ,चटक रहे अंगारे
नीचे सबके एक ही पानी, बस, उपर है काई
मैं हूँ हिन्दू,मैं हूँ मुूस्लिम ,पिछडा सिक्ख इसाई
आरक्षण मठ, मन्दिर,शंकराचार्यों में भी ढूंढो
अगडे,पिछडे, कौम, कबीलों के चेले नित मूंडो
ग्रन्थी, मौलवी और पादरी आरक्षण से लाओ
बस,धर्म बचा है,आरक्षण से,उसमे आग लगाओ
गीता, ग्रन्थ, कूरान, बाईबिल प्रेम के अक्षर ढाई
मैं हूँ हिन्दू,मैं हूँ मुूस्लिम, पिछडा सिक्ख इसाई
अब लालू, मोदी दोनो मरने को तैय्यार खडे हैं
अौर बिहार में आरक्षण के थोडा भाव बड हैं
सबके मूंह में एक ही मुद्दा, अब आरक्षण बांटेगे
उंच - नीच के बचे हुये बकरों को हम काटेगें
राजनीति की तलवारों को लेकर खडे कसाई
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुूस्लिम, पिछडा सिक्ख इसाई
कूंआ एक है, एक ही पानी, भाण्डे करे लडाई
न्यारी - न्यारी सूरत में भी, कुदरत एक समायी
जांति - पांति और कौम कबीले खोद रहे है खाई
हर झगडे की जड में सत्ता , नेता है हरजायी
कवि आग ये देश गरीबो का,जनता भौजायी
मैं हूँ हिन्दू, मैं हूँ मुूस्लिम, पिछडा सिक्ख इसाई ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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