दुर्गा-बिहार
हे, माँ दुर्गा देख सियासी पाप, धर्म को चूम रहे हैं
सारे नेता छोड के दिल्ली, क्यों बिहार में घूम रहे हैं
सभी प्रान्त के अच्छे - अच्छे तोते डेरा डाल रहे हैं
हे ,माँ दुर्गा प्रजातन्त्र को ये तोते क्यों पाल रहे हैं
चील, बाज और कव्वे पहले से बिहार में जमे हुये हेैं
अगडे, पिछडे, उँच, नीच के डी. एन. ए. में रमे हुये हैं
पी. एम. भी अपनी जाति को चौराहों पर खोल रहा है
क्यों भारत के स्वाभिमान को अपशब्दो से तोल रहा है
नेताओं के भाषण सुन लो ,गाली की भरमार मची है
हर नेता ने बोट-बैंक की छल,बल, कपटी चाल रची है
संविधान की,प्रजातन्त्र की इज्जत सडको पर लुटती है
हे माँ दुर्गा, भारत माता राजनीति से क्यों घुटती है
गौ - मांस, कंही आरक्षण, कंही मजहब कौम कबीला है
उँचे - उँचे पद पर बैठे, नेताओं की क्या लीला है
बडे - बडे वक्ता, प्रवक्ता ,वेद , शास्त्र को काट रहे हैं
चाणक्य की अर्थ - व्यवस्था अपने ढंग से छाँट रहे हैं
जिस बिहार ने विश्व जगत मे शिक्षा का परचम लहराया
उस बिहार से लालू, माँझी, पासवान चुन करके आया
समाजवाद के मिंया मुलायम असमंजस मे फसे पडे है
इस कीचड में पी. एम. मोदी भी तो पूरे धंसे पडे है
तेल, गैस, और मिर्च, मशाले सब की छाती कूट रहे है
दाल ,प्याज तो नंगे - भूखे, मध्य -वर्ग को लूट रहे है
मंहगयी के इस आलम में नेता सारे मौन खडे है
हे माँ दुर्गा, व्यभिचार के इस भारत में कौन धडे है
हर प्रान्त में बे - रोजगारी , भ्रष्टाचारी फैल रही है
नेताओं के हाथों में माँ देख जवानी खेल रही है
हे माँ दुर्गा ये भारत तो दुनिया में उपहास हो गया
कवि आग की प्रतिभा का तो हे माँ दुर्गा नाश गया।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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