सियासत में माता
गौ हत्या पर रोक लगाने से पहले गऊ माता पालो
धर्म के ठेकेदारों पहले, आश्रम, मठ, मन्दिर खंगालो
लावारिस गऊ माता भूखी सडको पर क्यों भटक रही है
धर्मधाम में गऊ सेवा की झूठी तख्ती लटक रही है
केवल राजनीति करने से गऊ माता को बचा पाओगे
मोक्ष दायिनी ,कामधेनू की परिभांषा कब तक गाओगे
गौ -हत्या करने वालो में ,सबसे ज्यादा हम दोशी है
शास्त्र गवाह है, सूरभि हमने हर युग में पाली पोशी है
आज सडक में लावारिस गऊ,दरदर ठोकर क्यों खाती हेै
गऊ माता पर बोलने वालों भक्तों शर्म नही आती है
कितने हिन्दू, आश्रम-धारी गऊ माता को पाल रहे हैं
चौराहों पर काम-धेनू की लुटि अस्मिता टाल रहे हैं
तैंतिस कोटि देव धरती है, फिर भी लावारिस मरती है
धर्म-कर्म में जीने वाली हिन्दू जनता क्या करती हेै
राजनीति के भाषण सुन लो , सम्प्रदाय की ठेकेदारी
गऊ माता तो घास को तरसी, घूम रही है मारी-मारी
गो-चर की भूमि को मिलकर सभी सियासी चाट रहे हैं
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई मिलकर टुकडे बाँट रहे हैं
कई दशको से हम सब मिलकर गऊ माता ही काट रहे हैं
अपनी-अपनी राजनीति है ,सभी सियासी छाँट रहे हैं
गऊ, गंगा, गायित्री, धरती ,चारों माता भटक रही हेैं
भू-माफियाओं के हाथो में धरती माँ भी लटक रही है
राजनीति में हिन्दू,मुस्लिम व्यभिचारी सब व्यवसायी हेै
धन्दे में मत-भेद नही है, डाकू सब भाई - भाई हैं
अब वही उबैसी, वही साक्षी, प्राची, प्रज्ञा बोल रही है
गऊ माताएं भटक रही है पोल धर्म की खोल रही है
इन पशुओं को मारो, काटो मौन सभी की भांषा है
राजनीति तो मजहब, कौम, कबीलो की अभिलाशा है
अगर देश के सारे हिन्दू गऊ माता घर - घर में पाले
मुशलमान भी धर्म, मजहब में गऊ रक्षा का भार उठाले
धर्म मजहब में होने वाली राजनीति खुद गिर जायेगी
नये धर्म को कवि आग की कविताएं फिर से गायेगी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो098973998
rajendrakikalam.blogspot.com

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