Thursday, October 29, 2015

                     
करवा-चौथ
पुरूषों  की हालत पतली है   करवा चौथ   मनाने को
चांद मांद  से  झांक रहा   है, सूरज  को  बहलाने को
पतिव्रता  सोन्दर्य   करण  का  पूरा  लाभ  उठाती है
तीज,चौथ  से  ज्यादा, वैलनटाइन डे  की  ख्याती है

एक पुरूष ना जाने  कितनी  करवा  चौथ  मनाता है
फिल्मों में तो  सुहाग रात  शादी  से  पहले  आता है
व्यवसायी  सौन्दर्य  प्रसाधन ,पति धर्म बतलाता है
कंही धर्म है कंही- कंही  ये  केवल  दिल  बहलाता है

रंडुवों का  त्यौहार  नही  है  भारत  के  इतिहासों में
क्यों फंसती  है  नारी,  बापू, नारायण  के  झांसों में
बापू  के  फारम - हाउस  में  करवा चौथ  मनाती है
एेसी खबरे टी0वी0 चैनल  से  ही  छनकर  आती हैं

त्यौहार  हमेशा  पतिव्रता  नारी  को  केवल भाता है
मेकप करने वालों का  तो  भारत  भाग्य  विघाता है
भ्रष्टाचारी,  व्यभिचारी  भी   करवा - चौथ  मनाते हैं
राजनीति  में  शोषण, पोषण, बलात्कार  आैकातें हैं

करवा चौथ,सौत, साडू  सब  खुलकर  खूब मनायेंगें
नारी छलनी झांक  रही  है  चांद  नजर  कब  आयेंगें
भूखी,प्यासी पतिव्रता  से  पतियों  का  मनारंजन है
ये नारी की ही हिम्मत है,जो पतिधर्म  दुख भंजन हेै

इस व्रत में संकल्प  करो,हम  भ्रूण गर्भ  नही तोडेगे
नारी व्रत में कन्या  धन  से,पुनः समाज  को जोडेगे
चन्दा सी बाला घर-घर में भारत  का  मान बढायेगी
पतियों  ने सम्मान  जो  खोया,पुनः धरा में लायेगी

करवाचौथ  कसौटी  हो, हर  पति, धर्म  को अपनाये
ये उत्सव भारत में भारत के कर्म मर्म को दिखलाये
संस्कारों से भटक  रही  है क्यों  ,पीढी   मेरे  देश की
कवि  आग  की लपटों  में जलती  है  होली भेष की।।
                  राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                       9897399815

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