लाश में आस
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
क्यों घूम रहे हैे उत्तराखण्डी मारे - मारे
उत्तराखण्ड बनाने वालो के घर फूंको
राज्य बनाने वालो के मुँह पर भी थूको
बज्रपात कर बरसादो, शोले - अंगारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
सब नंगे - भूखे, थोकदार तूने पनपाये
सारे डाकू शरण में तेरी भोग लगायें
उत्तराखण्ड में तेरे नाम की लूट मची हेै
राजनीति में तेरी इज्जत कंहा बची है
करते हैं फिक्वाल सभी अब वारे -न्यारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
कफन आपदा का नेता ने बेचा खाया
लाशों में भी ढूंढ रहे थे नेता माया
उडन खटोले, लेकर टोले घूम रहे थे
गिद्व सियासी कंकालो को चूम रहे थे
नेताओं की शक्ल देख कर मुर्दे हारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
राजनीति का संकट घर में गहराता हेै
न्यायालय की शरण में नेता चिल्लाता है
अब सारे डाकू न्याय कार्ट से मांग रहे हैं
अधिवक्ता भी अपनी सीमा लांघ रहे हैं
न्यायाधीश भी घूम रहे हैं मारे-मारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
रघुनन्दन भी भालू, बन्दर पनपाते हेैं
सब कांग्रेस के बीहड से डाकू आते हैं
कुछ जेब कतरने वाले माया के चेले हेैं
यू0 के0 डी0 के लावारिस भी अलबेले है
उत्तराखण्ड में चमक रहे हैं चाँद सितारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
जागो हे केदार पुनः ताण्डव दिखलाओ
हम को छोडो ,केवल नेताओं को खाओ
ये जैसे पहले थे, वैसा नंगा कर दो
एक बार फिर से कुछ ऐसा पंगा कर दो
अग्निवृष्टि की करो प्रभू इन पर बौछारें
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे
मैं आग वेदना की छन्दो से नित गाता हूँ
शब्द लपट से मुर्दो को नित समझाता हूँ
ग्लूकाेष चढाकर शवो में आशा पाल रहा हूँ
मैं श्वांस नली से हवा कफन में डाल रहा हूँ
अब कवि आग भी मुर्दो की बस्ती से हारे
हे बद्री भगवान उठो अब जागो प्यारे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

No comments:
Post a Comment