Friday, March 25, 2016

लिंग के किंग
ये भारत क्या माता है,या भारत भाग्य विधाता है
दो लिंगों के बीच फंसा ये राष्ट्र खडा कहराता है
तात-मात के द्वन्द में देखो ,लडते सारे भ्राता हेै
सबकी अपनी-अपनी ढपली अपना राग सुनाता है
अब राष्ट्र -भक्त की परिभांषा भी नेता हमें बताता है
ये भारत क्या माता है,या भारत भाग्य विधाता है

जांति,पांति और कौम ,कबीले भटक रहे लावारिस
मां में ढूंढो,बाप में ढूंढो, ढूंढो अपने-अपने वारिस
भारत मां की राष्ट्रभक्ति की बच्चे करें सिफारिस
वन्देमातरम्,जयहिन्द जैसी,कर्कस स्वर की बारिस
जिसको जो अच्छा लगता है उसको वही लुभाता है
ये भारत क्या माता है,या भारत भाग्य विधाता है

अखण्ड राष्ट्र की भांषा अब तक किस नेता ने गायी
हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई सब वोटर हैं भाई
सम्प्रदाय, मजहब की भांषा, नेता ने समझायी
मौन खडी है भारत माता ,कैसी पीर परायी
झगडे से भीमुल्ला,पण्डित, साधू, सन्त का नाता है
ये भारत क्या माता हेै,या भारत भाग्य विधाता है

भारत मां की जय कह कर सब पनप रहे हैं डाकू
हर मजहब में पनप रहे हैें कीडे सभी लडाकू
क्या राष्ट्र तिरंगे और खादी ने व्यााधी ही पनपायी
मां की इज्जत लूट रहे हैं, नेता खटिक, कसाई
खोल रहे हैं मां की इज्जत पर सब नेता खाता है
ये भारत क्या माता हेै,या भारत भाग्य विधाता है

कांग्रेस, बी0 जे0 पी0 हो या बाम पन्थ के पन्थी
बने हूये है धर्म, मजहब में ग्राहक ग्रन्थ के ग्रन्थी
नेता और अभिनेता दोनो शिक्षा को भटकांए
अब सारे नेता अनपढ भौंदू शिक्षालय में जायें
विद्याालय में जाकर नेता क्यों औकात दिखाता हेै
ये भारत क्या माता हेै,या भारत भाग्य विधाता है

जिन बच्चों को पढने भेजा, सडा रहे हैं भेजा
राजनीति ने लावारिस बच्चो का भाग्य सहेजा
शिक्षा मे अपशिष्ठ आवरण एक कनैह्या आया
इस शिक्षा ने, शिक्षा-दीक्षा, गुरूकुल को भटकाया
कवि आग ये लुटि-पिटी अब भारत गौरव-गाथा है
ये भारत क्या माता हेै, या भारत भाग्य विधाता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

No comments:

Post a Comment