Tuesday, March 29, 2016

पहाड की दहाड
सत्ताइस नक्षत्र, ग्रह नौ उत्तराखण्ड को चाट रहे हैं
पञ्च महाभूत निर्दलीय माल सियासी काट रहे है
और 29 बी.जे.पी. के शिखर में सत्ता छांट रहे हैं
36 व्यञ्जन देव-भूमि को दानवता में बांट रहे हैं

हवन हवि को सारे डाकू, हवन कुण्ड में डाल रहे हैं
चोर मण्डली में चोरों को चोर,चोर खंगाल रहे हैं
उत्तराखण्ड में, उत्तराखण्डी ही बीहड को पनपाते हैं
दशको से इस देव-भूमि में डाकू ही चुनकर आते है

16साल के भरे यौन में,आठ खसम करके छोडे हैं
उत्तराखण्ड की राजनीति में अय्यासी के ये घोडे हैं
दो साल में खसम छोड कर सत्ता, विधवा जाती हेै
नगरवधू भी राजनीति में देव-भूमि का सहलाती है

टिकट सियासी,हानीमून के न्यायालय से मांग रहे हैं
उत्तराखण्ड में सारे नंगे ,वस्त्र सियासी टांग रहे हैं
टी.वी. चैनल इन नंगो के अंग-भंग को दिखलाते हेैं
कुछ चैनल तो इन नंगो के कारण ही रोटी खाते हैं

देव-भूमि भी देवदास और देव - दासीयों को ढोती है
बलात्कार से लुटि पिटि पर्वत की जनता क्यों रोती है
राजनीति के वैश्यालय में रमण-भ्रमण ही तो होता है
उत्तराखण्ड तू,बलात्कार की घटनाओं से क्यों रोता है

राजनीति में कौव्वे भी तो हंस भेष में दिखते हैं
उत्तराखण्ड में,ठाकुर,पण्डित, वैश्य,शुद्र सब बिकते हैं
राजनीति के सारे कुत्ते खडे हुये नीलामी में
डुब रहे हैं शवान सभी, इस सागर समर सुनामी में

सतीत्व बचाना है अपना तो केन्द्र समर्पित हो जाओ
नासूर बने इन घावो के,भावो को अब ना सहलाओ
जो भी नेता जंहा दिखे, बस जूते मारो सालों के
बस, कवि आग कंकाल फूंकने बैठा यंहा दलालो के।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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