Friday, March 11, 2016

आर्ट आफ लीविंग
श्री श्री अब फ्री हो गये पी.एम. ने ज्यों हाथ धरा है
हे,रवि शंकर संविधान की धाराओं का घाव हरा है
धर्म,मोक्ष की बातें करने वाला धन से खेल रहा है
मेरा भारत धोती, लोटे और लंगोटे झेल रहा है

सत्ता और सियासी तोते श्री श्री के दास हो गये
राजनीति के इस सर्कस में सारे जोकर पास हो गये
लोक सभा और राज्य सभा में श्री फ्री में डोल रहे हैं
यमुना तट भी धर्म, कर्म के चीर हरण को खोल रहे हैं

जीव जीना कला कर्म है कलाकार ही ,बोल रहे हेैं
धन-दौलत के कीडे नंगो की पीडा को खोल रहे हेैं
दूनियांभर के नृत्य-भृत्य भी यमुना तट पर नाच रहे हैं
मेरे देश के नेता अखियों से सखियों को बांच रहे है

आज अचानक टी.वी. चैनल, गूंगे, बहरे शान्त हो गये
कल तक जो विपरीत खडे,आज सभी सम्भ्रान्त होगये
बुद्वि - बल्लभ, वाणी - भूषण, मुर्दे सारे मौन खडे हैं
सभी अखाडे बंटे हुये हैं ,सबके अपने अलग धडे है

रविशंकर अब बने कनैह्या, जमुना तट पर नाच रहे हैं
अधिवक्ता और कोर्ट, कचहरी कानूनो को बांच रहे हैं
श्री,फ्री में अर्थ - दण्ड की परिभांषा को तोड रहे हैं
अहिसुष्ण अध्याय देश में ये बाबा जी जोड रहे हैं

रोटी को मोहताज गरीबी आर्ट लीविंग से बच पायेगी
बे-रोजगारी आर्ट लीविंग से भारत माता को गायेगी
मंहगायी और भ्रष्टाचारी आर्ट लीविंग से हट जायेगी
लगता है अब अहिसुष्णता आर्ट लीविंग से ही आयेगी

दुनिया भर के नाच - नचैये इस दिल्ली में खेल रहे हैं
भारत मां के हम सपूत ही महाभारत को झेल रहे हैं
कानून यंहा पर नतमस्तक है रविशंकर ही खास होगये
कवि आग ये दाडी, वाले भारत में उपहास हो गये।।
राजेन्र्द पऱ्साद बहुगुणा(अाग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment