Wednesday, March 16, 2016

जहर की लहर
देश के नेता भारत को कश्मीर बना कर छोडेगें
आर्यखण्ड को जंगल की तस्वीर बना कर छोडेंगे
पूजा, पाठ, नमाजों को शमशीर बना कर छोडेंगे
कलियो को रंग-रलियों से अब तीर बना कर छोडेंगे

जहरीले शब्द,सलीखे से, विस्फोट स्वयं बन जाते हैं
घाव दबे हो दिल में तो ,वो चोट स्वयं बन जाते है
आसक्ति की अभिव्यक्ति से, खोट स्वयं बन जाते हैं
सम्प्रदाय में जनमत के ,सब वोट स्वयं बन जाते हैं

ये महामारी भी हर चुनाव के सीजन में ही आती है
प्रजातन्त्र में हर मरीज की हालत हमें बताती है
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्खों के नामुमकिन रोग शरीरों में
सढे़ घाव में नमक पडा मजहब के कौम के चीरों में

शल्य चिकित्सा के माहिर, सब नेता है उपचारों में
ढूंढ रहे अपनी नश्लें, सब लावारिस इन डारों में
हिन्दू हर-हर महादेव से शिव- ताण्डव दिख लाता हैे
मुल्ला,आयत भी कूरान से ढूंढ - ढूंढ कर लाता है

आध्यात्म जगत का बाबा हानीमून हमें समझाता है
चौरासी के दंगों को, ये नेता हमें बताता है
बचे खुचे कुछ और भी हैं, इतिहास विषैला ढूंढेगे
ये जगत -गुरू हैं भारत के, अब कितने चेले मूंडेगें

एक भी नेता सुना नही, जिसकी भांषा में भारत हो
एक भी नेता चुना नही ,जिसमें वो राष्ट्र इमारत हो
ये वैमनस्य के कीडे़ भी जनमत नीडों से आते हैं
ये चौथे स्तम्भ मिडिया, गीत सभी के गाते हैं

मुझको कोई दिखा नही, जो देश जोड कर एक करे
मुझको कोई दिखा नही, जो प्रेम मोड कर एक करे
मुझको कोई दिखा नही ,जो ऱाष्ट्रधर्म की बात करे
मुझको कोई दिखा नही, जो आग बने आघात करे!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815


rajendrakikalam.blogspot.com 

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