मेरा श्वान-महान
मुझे देख कर मुझ पर मेरा कुत्ता भौंका
इस प्रजातन्त्र की हरकत से तो मैं भी चौंका
मेरा खाकर मुझे ही कुत्ता काट रहा हेै
ये वोट - बैंक मेरा है, मुझको डांट रहा है
हमने जनमत के टुकडों से नेता को पाला हेै
पेट काटकर मांस, रूधिर इसको डाला है
अब चोैकीदार बनाया मुझको घूर रहा हेै
जिसको पाला, वो हमसे ही दूर रहा है
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख,ईसाइ जान रहा है
कौम ,कबीले, जांति,पांति पहचान रहा हेेै
जो जितना भौंकेगा, उतना नाम करेगा
जो मौन रहेगा,समझो वो बे-नाम मरेगा
सभी दलों को साथ लिये ये घूम रहा हेै
ये मेरा कुत्ता लोक सभा में झूम रहा है
पहले रोटी, अब केवल बोटी खाता हेै
ये प्रजातन्त्र,अब कुत्तो की गौरव गाथा है
हर झगडे में जनमत को ही जोड रहा है
अब तो ये विद्यालय में भी दौड रहा है
मेरा कुत्ता अब तो पिल्ले पाल रहा है
शिक्षा में भी प्रजातन्त्र खंगाल रहा है
पूरब, पश्चिम , उत्तर,दक्षिण पन्थ बनाये
अब रंग-बिरंगे कुत्ते चुनकर दिल्ली आये
राजनीति के पिल्ले उनको झांक रहे हेैं
आदर्श राष्ट्र का मुल्य,उन्ही में आंक रहे हेैं
कुत्ता बन कर, वफादार तो बनना सीखो
कुत्ते हो तो , पूरे कुत्तों जैसा दीखो
अगर देश का हर कुत्ता सत्ता में आए
कवि आग ये तन्त्र ,श्वान खुद ही बनजाए।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

No comments:
Post a Comment