सियासत में श्वान
उत्तराखण्ड के शक्तिमान सब खडे हो गये
जितने पिल्ले पाले थे सब बडे हो गये
कल तक जो विपरीत खडे,सब एक हो गये
चाल, चरित्र और चेहरे सारे नेक हो गये
इस सर्कस के सारे जोकर पास हो गये
चकबन्दी से प्रतिद्वन्दी उपहास हो गये
ठाकुर,पण्डित,वैष्य, शुद्र ,सब दास हो गये
जनता के जो सपने थे सब नास हो गये
विजय बहुगुणा पिता के पथ पर दौड रहा है
उत्तराखण्ड मे अणु सियासी छोड रहा है
दल बदलू की कला पिता से ही आयी है
ये राजनीति बीहड है, डाकू सब भाई है
भटका हुआ हरक सिह घर वापस आया
एक नही, बारह ,बे - घर लावारिस लाया
अनाथ भवन बी.जे.पी. सबको पाल रही है
अब पूरे देश मे लावारिस खंगाल रही है
चोैराहे पर ठाकुर की सरकार गिर गयी
गुण्डो के चगुल में कुर्सी,रजिया घिर गयी
असमंजस में उत्तराखण्ड का जनमत आया
जो भी कुत्ता पाला, उसने काटा खाया
हम सब प्रजातन्त्र के मुर्दे, मुर्दे पाल रहे हैं
इस सडी लाश में दफन,कफन खंगाल रहे है
हे उत्तराखण्ड के मुर्दो अब तो होश सभालो
कवि आग, खुजली के कुत्ते अब ना पालो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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