सुरंग में तुरंग
उत्तराखण्ड की देव भूमि में गधे आ गये
शक्तिमान बने , शिखरों का हरा खा गये
ये घोडे, खच्चर, टट्टू सारे घूम रहे हैं
सुरंग खोद कर, तुरंग शिखर में झूम रहे है
उत्तराखण्ड का बोझ गधे कब तक ढोयेंगे
गधे देख कर अब हम तुम कितना रोयेंगे
ये सारे खच्चर, गांधी वादी सन्त हो गये
सभी पहाडी नंगे ,ये सब महन्त हो गये
घोडे, खच्चर, टट्टू अब कितने पालोगे
भार शिखर का टट्टू पर कितना डालोगे
जागो उत्तराखण्ड वालों अब इन्हे भगाओ
नई नश्ल के तुरंग ढूंढ कर , चुनकर लाओ
ये कांग्रेस , बी. जे. पी., यू . के. डी के टट्टू
स.पा.,बा.स. पा .निर्दलीय हैं सभी निखटटू
ये सब लूले, लंगडे ,घोडे शक्तिमान नही हैं
उत्तराखण्ड की खच्चर से पहचान नही है
सारे खच्चर दिल्ली से पढकर आते हेैं
टिहरी, पौडी और कुमैय्ये बन जाते हैं
इन घोडों ने हरा - भरा पर्वत सब खाया
हमने भी तो इन घोडों पर दांव लगाया
अब घर के खच्चर संगत में बर्बाद हो गये
ये सारे कोढी, फोडे, फुन्सी, दाद हो गये
उत्तराखण्ड में ये नंगे उस्ताद हो गये
हम जनमत अपशिष्ठ सड गये खाद हो गये
हम डेढ दशक से घोडे, खच्चर झेल रहे हेैं
ये गधे शिखर पर कूद रहे हैं,खेल रहे हैं
गांधीवादी खच्चर तुम कब तक पालोगे
क्या कवि आग ये शिखर गधो पर ही डालोगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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