सत्ता का पत्ता
उर्वशी, मेनका ,रम्भाओं से रमण किया है
इन्द्रपुरी मे मैने पूरा भ्रमण किया है
राजनीति के ऋषियों के भी तप को तोडा
संसद का पथ मैंने अय्यासी में मोडा
मैं विजय माल्या, ललित मोदी का साढू भाई
समझ रहा हूँ राजनीति की पीर परायी
राज्यसभा में जो भी मुझको चुनकर लाए
सबने अपनी अय्यासी के लुफ्त उठाए
मोदी ने जो खेल किया ,मैं भी खेलूंगा
मैं कामदेव हूँ अय्यासी के फन झेलूंगा
दुनिया भर में मेरे अय्यासी के अड्डे
राजनीति को काम मिला है खोदो खडडे
मेरे चरण सभी सियासी चूम रहे थे
उद्योग पति भी मेरे पीछे घूम रहे थे
बैंक लोन की माया मुझ पर चढा रहे थे
मुझ चरित्रवान से अपनी इज्जत बढा रहे थे
जहाज, सवारी सत्ता की ,मेरे ढोते थे
फसल सियासी बंजर धरती में बोते थे
दुर्भाग्य नेता भी मुझको समझ ना पाये
किस मूँह से बोलेंगे जिसने टुकडे खाये
पहले मैंने प्रजातन्त्र औकात को भांपा
फिर पक्ष, विपक्षी दोनो के पेटों को नापा
मैं चार्वाक के पद - चिह्नो पर चलता आया
चौराहो पर राजनीति को खूब लुटाया
सब मेरे कू - कर्मो में नेता लिप्यमान है
चक्रव्यूह में फंसी सियासी सभी जान है
मोदी ने उत्पात मचाया क्या हल निकला
मैं भी लन्दन पहुच गया कैसा छल निकला
नेता, मेरा साथ यंहा कच्छे - नाडे का
इस देश का नेता है टट्टू भाडे का
सब मेरे साढू भाई सत्ता पाल रहे हैं
कवि आग क्यों राख, लपट में डाल रहे है
राजेन्र्द पऱ्साद बहुगुणा(अाग)
9897399815

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