Saturday, March 5, 2016

शिव के शव
कल शिवरात्र आने वाली है भोले बाबा
ये सभी नसेडी खोल रहे हैं अपना ढाबा
सुल्फा, भांग, धतूरा भारत घोट रहा हेै
प्रजातन्त्र में नशा हमेशा वोट रहा हेै

बाबा क्या बर्फों में भी सुल्फा होता है
हर अमली क्यों तेरे नाम को ही ढोता है
भक्तों ने भी,चिलम चढायी जय भोले की
ये सभी लंगोटे कूट रहे मिट्टी चोले की

भांग, धतूरा शिव - लिंगों को पाट रहा हेै
नशा देश के गृहस्थ,युवक को चाट रहा है
आदिकाल से हिम पर बैठे तुझको देखा
तेरे नाम से जहर समाज में किसने फेंका

शंकर ये वरदान नही , अभिशाप देश में
आज नपुंसक पीढी देखो, युवा भेश में
तेरा तप और जप भारत को भान नही है
नशे का तुझ को भी,कोई अनुमान नही है

क्या शंकर सुल्फा, भैरो दारू के आदि हेै
क्यों समाज पर,सम्प्रदाय की ये व्याधि हेै
बिना नशे के, पूजा में अडचन होती है
क्या कारण है नश्ल नशे को क्यों ढोती है

क्यों ठेकेदार धर्म के इस पर मौन खडे़ हैें
इसके पीछे देखो बाबा , कौन खडे़ हैं
कानून निशेध है,फिर भी ये बेचा जाता है
कुछ बोलो बाबा, इससे तेरा क्या नाता है

कोकिन, भांग, धतूरा, सुल्फा,मुल्यवान हैे
अब सुरा, सुन्दरी राजनीति में पहचान हेै
जो जितना अमली है वो ही चरित्रवान हेै
खूनी,कतली सभी नशेडी आज डान है

नशा मुक्त कर भारत को,गर तू भोला हैेे
बम बम की भांषा ,सुल्फे का ही गोला हेै
पुष्प, पत्र औेर दूध चढाने मैं आउंगा
कवि ‘आग’ हूं, छ न्दों में तुझको गाउंगा!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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