Monday, March 14, 2016

मेरा भारत नादान
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया
हर क्षेत्र की राजनीति में वैमनस्य प्रवेश हो गया
सिंह भेश में गीदड श्वान, सियार अरण्य में घूम रहे हैं
राष्ट्र भक्त ही बलात्कार और व्यभिचार को चूम रहे हैं
चोर, लुटेरा, गुण्डा, डाकू आज यंहा दरवेष हो गया
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया

गांधी वादी सभी लुटेरे कृषक भूमि को चूस रहे हैं
ये किसान भी काली माया धवल बना कर ठूंस रहे है
बैंक लोन ,उद्योग पति पर, बोरे भर कर डाल रहा है
इन चोरों को,संविधान,जज, अधिवक्ता ही पाल रहा है
मेरा भारत इन मुर्दों के कारण अब अवशेष हो गया
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया

लोक सभा और राज्य सभा में आतंकी ही भरे पडे हैं
सबके अपने-अपने बीहड, अपने-अपने अलग धडे हैं
कुछ मुर्दे ,जिन्दे लगते हैं मजबूरी में मौन खडे हैं
जिनको सत्ता मिल जाती है आज उन्ही के भाव बडे हैं
चोर,उचक्का, प्रजातन्त्र में अहंकार,अखिलेष हो गया
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया

मंहगायी भुखमरी गरीबी, चौराहों पर आ हो गयी
भोग,विलाशी बलात्कार से भारत माँ बदनाम हो गयी
कामदेव खादी में लिपटा, अय्यासी को झांक रहा है
लुटिपिटी इस यौवनता का,मुल्य सियासी आंक रहा है
राजनीति का काम -पिपासू,इन्द्र यंहा अवधेश हो गया
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया

जिस भारत में योगी-भोगी मिर्च-मशाला बेच रहे हों
आडम्बर में धंसे गेरूवे, धन-माया को खेैंच रहे हों
वेद-शास्त्र के गुप्त भेद को परदेशों में खोल रहे हों
मया के टूकडे खाकरके,जयघोष उन्ही का बोल रहे हों
उस भारत का लाल गेरूआ,अपना अग्नि-वेश खोगया
सोने की चिडिया का भारत चील,गिद्व का देश हो गया

देश के रक्षक,सीमाओं पर गोली खाकर मर जाते हों
आतंक वाद के राष्ट्र -गीत को घर के नेता ही गाते हों
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई अपनी ताकत बढा रहे हों
कौम कबीले,जांति-पांति भी माँ को सूली चढा रहे हों
कवि आग अब ऐसा भारत,अहिसुष्ण सन्देश हो गया
सोने की चिडिया का भारत चील, गिद्व का देश हो गया ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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