चोरी-सीनाजोरी
ये भारत का प्रजातन्त्र है, जिसमें भ्रष्टाचार लगा हेै
व्यवसायी,अधिकारी, नेताओं का केवल भाग्य जगा है
पीर, पादरी और, विरक्ती, मौलाओं ने खूब ठगा है
मध्यवर्ग और निम्नवर्ग को राजनीति से मिला दगा है
असमंजस होता है मुझको,कौन पराया,कौन सगा है
ये भारत का प्रजातन्त्र है, जिसमे भ्रष्टाचार लगा हेै
नेताओं के भाषण सुनकर आत्महनन को जी करता है
मन पागल है प्रजातन्त्र में,घुट-घुट कर,यूं ही मरता है
कफन में लिपटे, श्वेताम्बर,ये खादी कुर्ते जाग रहे हैं
जिन्न, भूत अब कब्रिस्तानी,शमशानो में भाग रहे हैं
सात दशक से नेताओं ने जनमानस पर खूब हगा है
ये भारत का प्रजातन्त्र है,जिसमे भ्रष्टाचार लगा हेै
जो भी सत्ता में आता है ,प्रतिपक्षी को खोल रहा हेै
अपने ढंग से भारत-भाग्य-विधाता,भांषा बोल रहा है
शब्दो की नूरानी कुस्ती, टी. वी. चैनल दिखलाते हैं
ये चौथे स्तम्भ, सियासी रोटी सब मिलकर खाते हेै
केवल नंगे चमक रहे हैं,जिस तन में ना पगा ,झगा हेै
ये भारत का प्रजातन्त्र है, जिसमे भ्रष्टाचार लगा है
वाणी-भूषण, बुद्वि-वल्लभ,कफन ओढ कर झाँक रहे हैं
राजनीति के प्रतिभाशाली, इनकी कीमत आँक रहे हैें
भारत- भूषण, पद्म-विभूषण, खर-दूषण का भेष धरे हैं
चापलूस पतिभा, पतिमा के पञ्जर से अवषेश हरे हैं
प्रजातन्त्र के शून्य-व्योम में उडने वाले यही खगा हैं
ये भारत का प्रजातन्त्र है, जिसमे भ्रष्टाचार लगा है
अहिसुष्णता फैल रही हैे प्रजातन्त्र की सूनामी में
उमड रही हेै, बलात्कार की लहरें, सत्ता के कामी में
कामुकता से सभी सियासी ,भारत माँ को देख रहे हैं
विभत्स दृष्टि की विषयवाशना भारत माँ पर फैंक रहे हैं
कवि आग की इन लपटों को नेताओं ने खूब ठगा है
ये भारत का पजातन्त्र है, जिसमे भ्रष्टाचार लगा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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