नया- अवतरण
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
मेरे देश के युवा जवानी में ही सड गये
सभी कनैह्या बनने की ही सोच रहे हैं
मां, बाप के सपने कफन से पोंछ रहे है
स्वप्नदोष के नेता नीदों में भी अड गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
जे.एन.यू., अब ब्रिन्दावन का धाम हो गया
ए.वी.बी.पी. आज अवध अभिराम हो गया
कंस, दुशासन, रावण दर्शन के प्यासे हेैं
ये राजनीति, सतरंज चाल के नये पासे हैं
गुरूकुल और मदरसे भी आपस में लड गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
इस चिन्तन में सारे चैनल जाग रहे हैं
अब सभी कनैह्या के पीछे ही भाग रहे है
मध्य-वर्ग को एक नया अवतार मिल गया
बाम-पन्थ,मुर्दो को कुछ उपचार मिल गया
सभी सियासी सत्ता शव से आज अकड गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
अब संविधान भारत का आँशू पोंछ रहा है
हे,भीम राव ,मैं कंहा फंसा हूँ, सोच रहा है
सम्प्रभुता सिद्यान्त सडक में डोल रहा है
चीर-फाड कर सदन मुझी को खोल रहा है
क्यों पक्ष- विपक्षी दोनो मेरे उपर चढ गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
अब चूनाव का मौसम गर्मी छोड रहा है
कबर से निकला मुर्दा घर - घर दौड रहा है
शिक्षालय से नये नमूने अब आयेंगे
ये नये शेर अब शहर, गाँव में गुर्रायेंगे
हे भारत माता शिशू-निकेतन सारे सड गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये
भगत सिंह,शेखर, सूभाष सब मौन खडे हैं
अब गाँधी,नेहरू और पटेल के अलग धडे हैं
इन्दिरा, अटल ,पटल सियासी देख रहे हैं
इस प्रजातन्त्र के उपर आँशू फेंक रहे हैं
कवि आग ये मुर्दे ,सब आपस में लड गये
विद्यालय में राजनीति के कीडे पड गये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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