Thursday, March 17, 2016

भारत की खोज
इस भारत में कितने भारत हैं भारत को पता नहीं है
रोज नया पैदा होता है, प्रजातन्त्र है ,खता नही हैं
अपने ढंग का हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाइ भारत वाशी
कहीं शिवाजी,टीपू,अकबर,सम्प्रदाय का मथुरा, काशी

हर प्रान्त अपने भारत को ,अपने ढंग से दिखलाता है
जिसके जैसा मन में आये उसको वैसा ही भाता है
अंग -भंग हो कर भी भारत, अपनो की पीडा सहता है
मेहमानों सा अपने घर में आॅंख मूॅंद कर चुप रहता है

डेढ़अरब की जनसंख्या को ये भारत ही पाल रहा है
भारत में ही भारतवाशी भारत को खंगाल रहा है
वाशीन्दो को भारत माता के बारे में ज्ञान नही है
इसिलिये तो भारतवाशी भारत का फरमान नही है

बी0जे0पी0 और काॅंग्रेस की भारत दृष्टि जुदा-जुदा है
माया और मुलायम ,लालू का भी भारत नया खुदा है
पूरब,पश्चिम, उत्तर, दक्षिण राजनीति के लाख धडे़ हैं
ये भी सारे भारत वाशी भारत से अनजान खडे हैं

एक सनातन धर्म एक है झण्डे सबके अलग-अलग हैं
नियम करम के पूजा पाठी,फिर भी उसकी कहाॅं झलक हैे
सम्प्रदाय भी धरम् करम् को हर दम नीचा दिखा रहा है
मन्दिर ,मस्जिद,गुरूद्वारा भी ,कैसी शिक्षा सीखा रहा है

राम ,कृष्ण और अल्ला ,ईश्वर क्यों भारत के चौराहे में
क्यों पलता है धरम् करम् भी आज सियासत् के साये में
इन झण्डों के हथकण्डों से भारत एक बना पाओगे
मुझे बताओ संविधान से सारे झगडे़ निपटाओगे

सात दशक से इस भारत का लिंग सियासत ढूंढ ना पायी
इस भारत को बाप कहूं या माता बोलूं समझ ना आयी
भारत माता की जय बोलो, ये झगडे अब भी जारी हैं
हे, आर्यखण्ड,ये प्रजातन्त्र क्यों तेरी छाती पर भारी है

पहले भारत के अन्दर ही भारत की पहचान बनाओ
अलग अलग झण्डो को छोडो, एक तिरंगा ही लहराओ
रीत एक हो गीत एक हो सबके मन का मीत एक हो
साज सभी के अलग-थलग हों पर सबका संगीत एक हो

सबसे पहले संविधान को राष्ट्र - लिंग अपनाना होगा
बस,एक राष्ट्र हो,एक गीत हो ,ऱाष्ट्र-गान ही गाना होगा
मजहब, कौम, कबीले सबको, राष्ट्र-भक्ति में आना होगा
कवि आग कहता है भारत, केवल राष्ट्र तराना होगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

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