तिरंगे का अपमान
मरकर नेता राष्ट्र तिरंगे में लिपटा है
राजनीति का भूत वतन पर क्यों चिपटा है
राष्ट्र तिरंगा भारत की गौरव गाथा है
शदियों से भारत मुर्दो का बई खाता है
स्वाभिमान मुर्दो का ध्वज से दूर हटाओ
जीवंत राष्ट्र का भाव तिरंगे में फहराओ
राष्ट्र ध्वजों से मुर्दों को कब तक ढोओगे
स्वाभिमान भारत का अब कितना खोओगे
सम्मान राष्ट्र का झण्डे से उंचा होता है
आज प्रतिष्ठा भ्रष्ट्र आचरण क्यों खोता है
निर्जीव ध्वजों से आज दरिंदे हठ जायेंगे
भारत मां का गीत परिन्दे भी गायेंगे
स्वच्छ छवि क्या राजनीति से बच पायेगी
लगता है भारत को खादी ही खायेगी
हर नेता को स्वाद लगा है अब चन्दे का
राजनीति उद्योग बना है बिन धन्धे का
राजनीति का लाभ धनी ही उठा रहे हैं
भाग ,काग ,हंसों का देखो जगा रहे हैं
राम,कृष्ण की धरती क्यों मरती जाती है?
भारत माता क्यों बच्चों से शर्माती है
क्यों राष्ट्र -पर्व ,तौहीन ,तिरंगा झेल रहा है
महाराष्ट्र ,सौ - राष्ट्र , लहु से खेल रहा है
क्यों खादी में भ्रष्टाचारी छिपे पडे हैं
एक तिरंगा , राजनीति में लाख धडे हैं
मन्दिर,मस्जिद,मॅंहगाई , कहीं माओवादी
क्यो आज तिरंगा देख रहा है ,ये बरबादी
देश की जनता राजनीति से हरदम हारी
आज तिरंगा हल्का हैं , बस! नेता भारी
आदर्श राष्ट्र का चौराहे पर रखना छोडो
राष्ट्र प्रेम को राजनीति से अब ना जोडो
शव को राष्ट्र ध्वजों से ढकना क्यों भाता है
राष्ट्र तिरंगा वस्त्र नहीं , भारत माता है ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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