Friday, January 23, 2015


          तिरंगे का  अपमान
मरकर   नेता   राष्ट्र   तिरंगे  में   लिपटा है        
राजनीति का भूत वतन पर क्यों चिपटा है
राष्ट्र  तिरंगा  भारत  की    गौरव   गाथा है
शदियों  से  भारत  मुर्दो  का  बई  खाता है

स्वाभिमान मुर्दो  का  ध्वज से  दूर  हटाओ
जीवंत  राष्ट्र का  भाव  तिरंगे  में   फहराओ
राष्ट्र  ध्वजों से  मुर्दों  को  कब  तक ढोओगे
स्वाभिमान भारत का अब कितना खोओगे

सम्मान  राष्ट्र  का  झण्डे  से  उंचा  होता  है
आज  प्रतिष्ठा  भ्रष्ट्र  आचरण  क्यों  खोता है
निर्जीव ध्वजों  से आज  दरिंदे  हठ  जायेंगे
भारत  मां  का  गीत   परिन्दे    भी  गायेंगे

स्वच्छ छवि क्या राजनीति से बच  पायेगी
लगता  है  भारत   को  खादी    ही  खायेगी
हर  नेता  को  स्वाद लगा  है अब चन्दे  का
राजनीति  उद्योग   बना  है  बिन  धन्धे का

राजनीति  का  लाभ  धनी  ही   उठा रहे  हैं
भाग ,काग ,हंसों   का   देखो   जगा  रहे  हैं
राम,कृष्ण की धरती  क्यों  मरती जाती  है?
भारत  माता   क्यों  बच्चों   से  शर्माती  है

क्यों राष्ट्र -पर्व ,तौहीन ,तिरंगा  झेल रहा है
महाराष्ट्र ,सौ - राष्ट्र , लहु   से  खेल  रहा  है
क्यों   खादी  में   भ्रष्टाचारी    छिपे   पडे हैं
एक  तिरंगा , राजनीति   में   लाख  धडे हैं

मन्दिर,मस्जिद,मॅंहगाई , कहीं माओवादी
क्यो आज तिरंगा  देख रहा  है ,ये  बरबादी
देश   की  जनता राजनीति  से हरदम हारी
आज  तिरंगा  हल्का  हैं , बस!  नेता  भारी

आदर्श राष्ट्र   का  चौराहे  पर  रखना  छोडो
राष्ट्र  प्रेम  को  राजनीति से अब ना   जोडो
शव को राष्ट्र ध्वजों  से ढकना क्यों भाता है
राष्ट्र तिरंगा    वस्त्र   नहीं , भारत   माता है ।।
             राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                   9897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:

Post a Comment