Wednesday, January 21, 2015


                  दिल्ली का दंगल
मुझे  भी  देश  का  नेता,  अरे  कोई  बना  दो ना
बिकता  है  वतन  मेरा , क्रेता  कोई  बना  दो ना
सियासत  के  भँवर में  हूँ,खेता कोई  बना दो ना
डकैती  किस  तरह  होगी, वेत्ता  कोई बना दो ना

दिल्ली  में  सियासत  का  ये सर्कस खेल जारी है
यहाँ  पर  मर्द  जोकर  है, यहाँ  सर - दर्द  नारी है
कही  बेदी, कंही मोदी, कंही  अरविन्द  दिखता है
यहाँ झोपड  पट्टी  से  सियासी भाग्य लिखता है

खादी  के  लिबाशों को  यहाँ  पर  भीख मिलती है
नंगो  से  सियासत  की यहाँ  बुनियाद  हिलती है
सफर  सत्ता  का  मजदूरों  के बोटो से ही आता है
डकैतों  को  भी  खादी  में  यहाँ  वोट   बनाता  है

यहा  शब्दो  के  सौदागर  सियासत को  लुटाते है
यहा  हर  कौम  के  कल्में, नेता   जी  ही  गाते है
कंही  पानी, कंही  बिजली  के  सौदे  रोज  होते है
जहर  जाति  के जज्बातो के  नेता  जी ही बोते है

यहाँ हिन्दू, यहाँ मुस्लिम,यहाँ पर सिक्ख, इसाई
हजामत  रोज  करते   हैं  सियासत में  छिपे नाई
यहा  प्रधानमन्त्री   भी  तो   बोटो   के भिखारी है
हूकूमत  देश  की  दिल्ली   के  दरबारों से  हारी है

दल  बदलू   सियासत  में  यहा  हर रोज  आते है
जो  देते  थे  कभी  गाली, अब  मोदी  ही  गाते है
हूकूमत  ही नमूनो  को सडक  पर  खींच लाती है
नेता   की   यहाँ   औकात  ये  दिल्ली  बताती  है

हमें   चैनल  जमूरो  की  जमातो   को  दिखाता है
यहा  हर शख्स,तारीफों में अपने ही  गीत गाता है
मैं  भी  इन जमातो से, सफर  सत्ता  के सिखता हू
तभी मैंआग की लपटो से,खुलकर रोज लिखता हू।।
           राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                   9897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com

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