मैं संविधान हूँ
मैं हूँ हिन्दुस्तान, करो सब मिल मेरा बलिदान
मैं संविधान के पन्नो में ही मौन खडा हू
कानून है अफलातून, मनाये मिलकर हानीमून
मैं संविधान के पन्नो में हर बार सडा हू
यंहा मुँह में नही लगाम,चाहे अल्लाह हो या राम
मैं संविधान के पन्नो में भी अलग धडा हूँ
आतंकवाद की खाद, मैं हूँ धर्म, मजहब जेहाद
मैं संविधान के पन्नो में, तस्वीर जडा हूँ
मैं हूँ लालकिला खपरैल, मैं हूँ राजनीति का खेल
मैं संविधान के पन्नो में ही आज बडा हूँ
मैं हूँ जाँति-पाति जज्बात,मैं हूँ प्रजातन्त्र औकात
मैं संविधान के पन्नो में भी विदुर छडा हू
मैं हूँ सम्प्रदाय की आग,जिसमें बडे-बडे हैं घाघ
मैं संविधान के पन्नो में ही लाश पडा हूँ
मैं खंजर हूँ ,मैं खून, मेरे पक्ष में है कानून
मै संविधान के पन्नो में ही सिर्फ कडा हूँ
मैं सब झगडो का मूल,यही है संविधान की भूल
मैं संविधान के पन्नो में हर बार लडा हूँ
मैं हूँ डेढ अरब की भीड, मेरे अलग-अलग है नीड
मैं संविधान के पन्नो में गल-गल के सडा हू
मैं हूँ कवि आग बे-बाक,मैं हूँ शोला,शबनम,राख
मैं संविधान के पन्नो से ही तो पिछडा हूँ
मेरी चिन्गारी मेंओज,जिसको पढते हैं सब रोज
मैं संविधान के पन्नो का ही तो लफडा हूँ
मैं,मठ,मन्दिर भगवान,मैं मुस्लिम कब्रिस्तान
मैं हूँ मानव की पहचान,मैं हूँ हरा भरा मरूधान
मैं हूँ भारत का गुणगान, मैं राष्ट्र-भक्त की जान
तुम रोज करोअपमान मै हू फिर भी हिन्दुस्तान
मैं संविधान हूँ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ( आग )
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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