वोट के भिखारी
प्रजातंत्र में , कलाकार की माया देखो
राजनीति के सम्मोहन से रोटी सेंको
घर में आया प्रजातन्त्र का एक भिखारी
बोला भैया कैसे हो तुम श्याम बिहारी
दयानिधि हो तुम तो आने वाले कल के
मेरुदण्ड हो, बैशाखी हो, छल के बल के
पहले भी उपकार किया था अब भी कर दो
परिवारों के वोट मेरी झोली में भर दो
घूम रहें हैं भीख मांगते धनी भिखारी
कितने पागल बन जाते हैं श्याम बिहारी
भूखी ,नंगी जनता सीढी बन जाती है
क्यों प्रजातंत्र, भिखमंगो की पीढी खाती है
ये भ्रष्टाचारी सदियों से हम देख रहे हैं
ब्रह्म - अस्त्र मतदान, धूल में फेंक रहे हैं
मत देना भी मत - दाता की मजबूरी है
ये संविधान ही चोर उच्चकों की धूरी है
बडे - बडे. भिखमंगे देखो आज देश में
निर्भय घूम रहे हैं गीदड. सिंह भेश में
बिष्टा, निष्ठा की भाषण में क्यों होती है
भारत माता आज प्रतिष्ठा क्यों खेाती है
फजलू,ननकू,जाँन, मुहम्मद की मति मारी
राजनिति के नौकर, मालिक पर हैं भारी
अब किरण,केजरी, माकन डोरे डाल रहे हैं
हम श्याम बिहारी, राजनीति को पाल रहे हैं
ये मुर्दा मतंग देख, सासन में कैसे आया
जनता को भिख मंगा देखेा कैसे भाया
नंगेपन का मतलब चिन्तन हीन दिशा है
क्यों भ्रष्ट रोशनी पाता है, आदर्श निशा है
समय काल के साथ बदलना खुद को जानो
गीता भी कहती है खुद की गति पहचानो
राजनीति से धर्म मजहब को दूर हटाओ
बस,एक धरम की मानवता धरती में लाओ
चिन्तन की बुनियादों पर तो राष्ट्र खडा है
भटक गयी है भीड., भिखारी, देश सढा है
मालिक होकर ,आज प्रजा नौकर से हारी
वतन,पतन के कारण हैं हम श्याम बिहारी ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
प्रजातंत्र में , कलाकार की माया देखो
राजनीति के सम्मोहन से रोटी सेंको
घर में आया प्रजातन्त्र का एक भिखारी
बोला भैया कैसे हो तुम श्याम बिहारी
दयानिधि हो तुम तो आने वाले कल के
मेरुदण्ड हो, बैशाखी हो, छल के बल के
पहले भी उपकार किया था अब भी कर दो
परिवारों के वोट मेरी झोली में भर दो
घूम रहें हैं भीख मांगते धनी भिखारी
कितने पागल बन जाते हैं श्याम बिहारी
भूखी ,नंगी जनता सीढी बन जाती है
क्यों प्रजातंत्र, भिखमंगो की पीढी खाती है
ये भ्रष्टाचारी सदियों से हम देख रहे हैं
ब्रह्म - अस्त्र मतदान, धूल में फेंक रहे हैं
मत देना भी मत - दाता की मजबूरी है
ये संविधान ही चोर उच्चकों की धूरी है
बडे - बडे. भिखमंगे देखो आज देश में
निर्भय घूम रहे हैं गीदड. सिंह भेश में
बिष्टा, निष्ठा की भाषण में क्यों होती है
भारत माता आज प्रतिष्ठा क्यों खेाती है
फजलू,ननकू,जाँन, मुहम्मद की मति मारी
राजनिति के नौकर, मालिक पर हैं भारी
अब किरण,केजरी, माकन डोरे डाल रहे हैं
हम श्याम बिहारी, राजनीति को पाल रहे हैं
ये मुर्दा मतंग देख, सासन में कैसे आया
जनता को भिख मंगा देखेा कैसे भाया
नंगेपन का मतलब चिन्तन हीन दिशा है
क्यों भ्रष्ट रोशनी पाता है, आदर्श निशा है
समय काल के साथ बदलना खुद को जानो
गीता भी कहती है खुद की गति पहचानो
राजनीति से धर्म मजहब को दूर हटाओ
बस,एक धरम की मानवता धरती में लाओ
चिन्तन की बुनियादों पर तो राष्ट्र खडा है
भटक गयी है भीड., भिखारी, देश सढा है
मालिक होकर ,आज प्रजा नौकर से हारी
वतन,पतन के कारण हैं हम श्याम बिहारी ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
9897399815
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