देश की इच्छा
इस राजनीति के टुच्चेपन से जग में मान नही होगा
अब तक जो कुछ भी झेला है उसका गुणगान नही होगा
दो देश के नेता मिलने से भारत उत्थान नही होगा
अस्तित्व मिटादो धरती से तब तक सम्मान नही होगा
फौजों की हिम्मत टूट चुकी ,इन राजनीति फरमानो से
सरहद के सिपाही व्याकुल हेैं, बे-मतलब मरती जानो से
कितने वीरों की लाशों को इस राष्ट्र-ध्वजा से ढोओगे
बे-मौत हमें मरवा करके सरहद पर कब तक रोओगे
या तो आदेश करो हमको, या खुद रस्ते से हठ जाओ
राष्ट्र - भक्ति की शक्ति को आसक्ति से अब ना खाओ
सुन्दर - सुन्दर शब्दो से दुश्मन पर वार नही होता
नसूरों को सहलाने से तन का उपचार नही होता
सरहद के फौजी वीरों में संग्राम की इच्छा पूरी हेेै
जो लुटा दिया था गलती से,वो भारत भाग जरूरी है
भारत माँ की रोटी का अब ज्यादा तृष्कार नही होगा
आतंकी, मजहब ,मदरसो का,धोखा इस बार नही होगा
भारत का हिन्दू, मुस्लिम भी ,तैय्यार खडा है लडने को
हर मजहब, कौम, कबीला भी, लाचार खडा है अडने को
अब भारत माँ के बच्चों का फरमान कहर बरपायेगा
अब कूरान का फतवा ही, आतंक - वाद को खायेगा
अब कुरू-क्षेत्र महाभारत का सरहद के पार बनायेगे
राष्ट्र - गीत हम भारत का ,काबुल, कान्धार में गायेगे
बस राजनीति की बाधाएं, थोडा सा पथ से हठ जाये
कवि आग की लपटों मे, बस पाकिस्तान सिमट जाये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
इस राजनीति के टुच्चेपन से जग में मान नही होगा
अब तक जो कुछ भी झेला है उसका गुणगान नही होगा
दो देश के नेता मिलने से भारत उत्थान नही होगा
अस्तित्व मिटादो धरती से तब तक सम्मान नही होगा
फौजों की हिम्मत टूट चुकी ,इन राजनीति फरमानो से
सरहद के सिपाही व्याकुल हेैं, बे-मतलब मरती जानो से
कितने वीरों की लाशों को इस राष्ट्र-ध्वजा से ढोओगे
बे-मौत हमें मरवा करके सरहद पर कब तक रोओगे
या तो आदेश करो हमको, या खुद रस्ते से हठ जाओ
राष्ट्र - भक्ति की शक्ति को आसक्ति से अब ना खाओ
सुन्दर - सुन्दर शब्दो से दुश्मन पर वार नही होता
नसूरों को सहलाने से तन का उपचार नही होता
सरहद के फौजी वीरों में संग्राम की इच्छा पूरी हेेै
जो लुटा दिया था गलती से,वो भारत भाग जरूरी है
भारत माँ की रोटी का अब ज्यादा तृष्कार नही होगा
आतंकी, मजहब ,मदरसो का,धोखा इस बार नही होगा
भारत का हिन्दू, मुस्लिम भी ,तैय्यार खडा है लडने को
हर मजहब, कौम, कबीला भी, लाचार खडा है अडने को
अब भारत माँ के बच्चों का फरमान कहर बरपायेगा
अब कूरान का फतवा ही, आतंक - वाद को खायेगा
अब कुरू-क्षेत्र महाभारत का सरहद के पार बनायेगे
राष्ट्र - गीत हम भारत का ,काबुल, कान्धार में गायेगे
बस राजनीति की बाधाएं, थोडा सा पथ से हठ जाये
कवि आग की लपटों मे, बस पाकिस्तान सिमट जाये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
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