Sunday, May 24, 2015

   प्रजातन्त्र में मुर्दा
राजनीति  के  सभी   दलो  ने  पिंजरे खोले
कुछ तोते दिनकर, अशोक  की   भांषा बोले
कवियों ने तो  महफिल मे भी लाज लुटायी
इस  लोकतन्त्र  मे  सभी  मदारी भाई-भाई

प्रजातन्त्र  में जनमत  का सम्मान  नही हेै
आधा  जनमत  मुर्दा  है   कंही जान नही है
मुर्दो  के  जनमत  से मुर्दे  चुनकर  आते हैं
जो  जिन्दे  हैं  ,बोट   डालने  कब   जाते है

नंगा-भूखा,  मध्य - वर्ग   ही   प्रजातन्त्र हेै
राजनीति   का  यही   देश  में  मरा यन्त्र है
निजी   स्वार्थ,  शब्दो  में  नेता   ढूंढ  रहे हैं
सब  मठाधीश  मजहब के  चेले  मूड रहे हेैं

हर   चौराहों  पर  राजनीति  की  चर्चा जारी
कंही  नेता  नपनो  में  हल्का  हैं कही भारी
मारपीट,  गाली,  ग्लौज   भी   हो  जाती है
ये राजनीति  बस, चौराहों  को  ही  भाती हेै

सभी  विरोधी  नेता , अन्दर  सभी  एक है
पागल जनमत  हैे जिनमे भी धडे अनेक हेै
डाकू  में  आदर्श   सभी  को  दिख जाता है
प्रजातन्त्र  का  मन्दिर, बीहड  को भाता है

पढे - लिखे , मुर्खों   के  पीछे  भाग  रहे हैं
घर बार  छोड कर चौबीस घण्टे जाग रहे हेैं
मात- पिता  की  तृष्कारी ,  यौवन पीढी हेै
ये भारत भाग्य विधाता की पहली सीढी है

अब चौथा  स्तम्भ,दम्भ  से बिक जाता है
चैनल  में  तोता  रटा-रटाया   ही  आता हेै
अपने झण्डे  तर्क- कुतर्क  से   टांग रहा है
चैनल  तो बस,अपनी  कीमत मांग रहा हेै

परदेशों  में  कंहा-कंहा  पी0 एम0 जाता है
ब्रेकफास्ट में,डीनर में  क्या-क्या  खाता हेै
अब लंच, मंच ,प्रपंच कैमरा  खोज  रहा हेै
ये चैनल-पैनल,प्रजातन्त्र  को  नोच रहा हेै

बहस  देश  में  इनको  सुनकर ही  होती हैं
सभी   पार्टीया  अपने  चैनल  को  ढोती हैं
अधमरे बोट  से सरकारे  भी  बन  जायेंगी
कवि  आग ,ये बात समझ मे कब आयेंगी।।
          राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                    9897399815
        rajendrakikalam.blogspot.com

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