प्यारू-न्यारू उत्तराखण्ड
घूम रहे थे मारे - मारे नाली मुटठी पाने को
नेता जी अब ढूॅंढ रहे है देहरादून ठिकाने को
कोदा,मंडवा और झंगोरा ,धबडी मिली विरासत में
अब तो मुर्गा चबा रहा हेैे नेता देख सियासत में
मुख्यमंत्री ढूॅंढ रहा चोरों के ठौर ठिकाने को
लावारिस भी लालाहित है पूरी कीमत पाने को
खोज रहे हैं बी0 जे0पी0 के नंग विधायक भाडे़ में
भूखे नंगे डटे हुये हैं उत्तराखण्ड अखाडे़ में
जनमत क्यों नीलाम हुआ है आज भरे चौराहे में
भू-कम्प भयंकर देख रहा हूॅं राजनीति के साये में
क्या जरूरत थी उपर से नेता को यहाॅं जमाने की
राजनीति की परम्परा, जयचंद फन्द लटकाने की
अर्थ-व्यवस्था खोल रही है नंगे पडे खजानो को
पाल रहे है फिर भी देखो, लावारिस मेहमानों को
शर्म नही आती है हमको अपना घर लुटवाने में
ठाकुर, पण्डित,वैश्य,शूद्र का बोट बैंक तहखाने में
क्या चुनाव के लडने से अब भाग्य सुधरने वाला हैे
उत्तराखण्ड में बिन पेंदी का लोटा ही मतवाला है
जनता सब कुछ देख रही है,धन्धा चोर चकारी का
नेताओं पर आस लगी है ,कैसा खेल मदारी का
कंही कुमाॅंउ चिल्लायेगा कंही टिहरी, पोैडी गायेगा
भू - माफिया गैर- सैण में पूरी आस लगायेगा
राम-राज भी ढूॅढ रहा है अपने खाली तरकस को
सारी दुनिया देख रही है उत्तराखण्ड के सर्कस को
पानी और जवानी से अब राजधानी चिल्लाते हो
भूखे नंगों के सपनो में छत्तीस व्यंजन खाते हो
उत्तराखण्ड की अय्यासी में खादी और लंगोटे हैं
देव - भूमि को चरने वाला ,कंही सांड कंही झोटे हैं
हाथ सफायी वालों से हम चमन बनाना चाहते हैं
उत्तराखण्ड के जनमानस को यवन बनाना चाहते हैं
थोडी सी भी बुुद्धि है तो केन्द्र समर्पित हो जाओ
हम तो पहले से नंगे है और ना नंगा करवाओ
सीधे-साधे पथ पर चलना ये संस्कार हमारा है
धर्म-सनातन,स्वर्ग, मोक्ष, भी आविष्कार हमारा है
मोक्ष दायिनी माॅं गंगा भी मेरे घर से बहती है
छल,कपटी व्यभिचारों को,ये देवभूमि क्यों सहती है!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
घूम रहे थे मारे - मारे नाली मुटठी पाने को
नेता जी अब ढूॅंढ रहे है देहरादून ठिकाने को
कोदा,मंडवा और झंगोरा ,धबडी मिली विरासत में
अब तो मुर्गा चबा रहा हेैे नेता देख सियासत में
मुख्यमंत्री ढूॅंढ रहा चोरों के ठौर ठिकाने को
लावारिस भी लालाहित है पूरी कीमत पाने को
खोज रहे हैं बी0 जे0पी0 के नंग विधायक भाडे़ में
भूखे नंगे डटे हुये हैं उत्तराखण्ड अखाडे़ में
जनमत क्यों नीलाम हुआ है आज भरे चौराहे में
भू-कम्प भयंकर देख रहा हूॅं राजनीति के साये में
क्या जरूरत थी उपर से नेता को यहाॅं जमाने की
राजनीति की परम्परा, जयचंद फन्द लटकाने की
अर्थ-व्यवस्था खोल रही है नंगे पडे खजानो को
पाल रहे है फिर भी देखो, लावारिस मेहमानों को
शर्म नही आती है हमको अपना घर लुटवाने में
ठाकुर, पण्डित,वैश्य,शूद्र का बोट बैंक तहखाने में
क्या चुनाव के लडने से अब भाग्य सुधरने वाला हैे
उत्तराखण्ड में बिन पेंदी का लोटा ही मतवाला है
जनता सब कुछ देख रही है,धन्धा चोर चकारी का
नेताओं पर आस लगी है ,कैसा खेल मदारी का
कंही कुमाॅंउ चिल्लायेगा कंही टिहरी, पोैडी गायेगा
भू - माफिया गैर- सैण में पूरी आस लगायेगा
राम-राज भी ढूॅढ रहा है अपने खाली तरकस को
सारी दुनिया देख रही है उत्तराखण्ड के सर्कस को
पानी और जवानी से अब राजधानी चिल्लाते हो
भूखे नंगों के सपनो में छत्तीस व्यंजन खाते हो
उत्तराखण्ड की अय्यासी में खादी और लंगोटे हैं
देव - भूमि को चरने वाला ,कंही सांड कंही झोटे हैं
हाथ सफायी वालों से हम चमन बनाना चाहते हैं
उत्तराखण्ड के जनमानस को यवन बनाना चाहते हैं
थोडी सी भी बुुद्धि है तो केन्द्र समर्पित हो जाओ
हम तो पहले से नंगे है और ना नंगा करवाओ
सीधे-साधे पथ पर चलना ये संस्कार हमारा है
धर्म-सनातन,स्वर्ग, मोक्ष, भी आविष्कार हमारा है
मोक्ष दायिनी माॅं गंगा भी मेरे घर से बहती है
छल,कपटी व्यभिचारों को,ये देवभूमि क्यों सहती है!!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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