Tuesday, May 19, 2015

                   मर्म-शर्म-धर्म-गर्म
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है
चैनल  मे  भी  धर्म  का  धन्धा हर चैनल की लाचारी है
निर्मल  बाबा  चाय, समोसे, चटनी  सबको दिखा रहे है
अष्टांग योग के करतब बाबा कुछ  चैनल मे सिखा रहे है
धर्म  का  धन्धा  करने  वालो  पर  भी तो माया भारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

ईशू   बाबा  के   कुछ  तोते   हर   भांषा  में  बोल रहे है
अब कूरान  की  आयत  लेक  मुल्ला जी भी डोल रहे है
गीता और रामायण  का   तो  चैनल में  अम्बार लगा है
निरंकार  और राधा-स्वामि  वालो का भी  भाग्य जगा है
आधा  हिन्दुस्तान  मगन है, सभी समर्पित है नर नारी
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

सौन्दर्य प्रसाधन, मेकप  करके सारे गुरू जर झूम रहे है
कुछ तो  पारंगत  शिष्यों  को  गले  लगाकर  चूम रहे है
फिल्मी गानो  को  भजनो  में  तोड,जोड कर सुना रहे है
भक्तो की  औकात  देख  कर  भाव  भंगिमा  भुना रहे है
गुरू जी के  एजेन्ट  भीड  में बने  हुये सारे बहमचाारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

केइ गऊ  माता  की  गाथा,माँ-माँ  कह  कर बोल रहा है
कोई   गंगा  में  गायित्री  अपने   ढंग   से  घोल  रहा है
कोई  सत्य, अहिंसाओं  की  परिभांषा  से  जगा  रहा है
कोई  मोक्ष  दिखा  कर ,सबके पाप,ताप से भगाा रहा है
चेलों  पर भी चंचल - चितवन  दृष्टि  गुरूजी  की जारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

चौराहों   के   जगरातो   से  अब  माँ दुर्गाा भी शर्माती है
बजरंग बलि को हर मंगल  को केवल  बूंदी  ही  भाती है
शनि देव  की  साढे  सती  और  ढैय्या  भी  मार  रही है
दूध , तेल  और  गंगाजल  से  दशा सभी की तार रही है
बलि - प्रथा  मुर्गो, बकरों  की, कुछ  भक्तों की लाचारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

इतने  धर्म-कर्म  का भारत ,महाभारत  को  झेल रहा है
सबसे  उँचा  चोर , उचक्का, धर्मो  में  खुश  खेल रहा है
कोष-कोष में जेल  खुली है ,फिर भी मुजरिम भरे पडे है
गाँव-गाँव  स्कूल - मदरसे  सम्प्रदाय  के  अलग  धडे है
स्तयुग में  ये ज्ञान नही था,जो इस कलियुग में जारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है

इतना ज्ञान-ध्यान इस युग में,घर-घर   मे शिक्षा जारी है
जगत गुरू  की  भीड  लगी है फिर भी  माँग रहे भिक्षा है
कुछ गरीब,कुछ मघ्यवर्ग,कुछ अरब-खरब में खेल रहे है
राजनीति  को  भारत-भाग्य-विधाता जनमत झेल रहे है
कवि आग  हम  भारत  माँ  से  क्यों करते  से गद्दारी है
हर चैनल में बलात्कार और व्यभिचार अब तक जारी है।।
                 राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
                      मो0 9897399815
           rajendrakikalam.blogspot.com

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