Wednesday, May 13, 2015

                           चीन का सीन
मोदी   भैया   चीन  गये,  कुछ   साथी   गमगीन गये
सारे  चैनल  पहले  पंहुचे , साथ  में  केवल  तीन गये
हिम  शैलखण्ड  कैलाष  हमारा, मानसरोवर छीन गये
सरहद   पर  अपनी   धरती   थी,  धीरे-धीरे  बीन गये

अपना  कब्जा  चीनी  चूंहे  दिल्ली  पर  भी बोल रहे हैं
भारत की सीमा  से पाकिस्तान  का रस्ता  खोल रहे है
नैपाली   सीमा   से  माओवादी    भारत   छान  रहे हेै
हम भी हिन्दू  कहकर  इनको भाई  अपना मान रहे है

उद्योग जगत  के उत्पादन  को भारत में  ही बेच रहे हैं
मेरे  देश   की  असली  पूंजी, ये चीनी   ही  खैच रहे है
भारत   का   उद्योगपति  भी   धीरे-धीरे  सिमट रहा हेै
चिन्तन का आभाव देश  में व्यापारो  से  निपट रहा है

सुन्दर-सुन्दर सस्ती  चीजें  भारत  वाशी  को  भाती है
भव्य - सभ्यता  परदेशों   की   धीरे -घीरे  से  आती है
झूठे  आन,बान,शानो  से  संस्कारो   को  हम  खोते हेैं
ये राष्ट्र  हमेशा   नेताओ   के  कू-कर्मो  से   ही  रोते हैं

अमरीका, जापान, चीन  की नजरें  हम पर गढी पढी है
भारत में  तो  छोटे - मोटे   देशों  की   भी  माँग बढी है
बंग्ला,तिब्बत,नैपाली  को  हम   शदियो से झेल रहे हैं
असली   भारतवाशी   नंगा,  शरणागत  ही  खेल रहे है

स्वाभिमानी अन्य  देश से भारत  ने  कुछ सीखा होता
सोने की चिडिया का चेहरा क्यों दुनिया में  फीका होता
अति  बोलने,अति  डोलने  से इज्जत  गिरती जाती हेै
कवि  आग का छन्द नही ,ये  शास्त्र-वेदना समझाती है।।
                  राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                     मो0 9897399815
        rajendrakikalam.blogspot.com  

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