Friday, May 8, 2015

               उत्तराखण्ड में बाबा के ढाबे        
गुल चमन  है इनकी बातों में रिस्ता है कितनी जातों में
कहीं  नदी  वार कहीं  नदी  पार  ये कैसा युद्व अनाथों में
यहाॅं  पुरूष  घूमते   बाडों  में नारी  है  नरक  पहाडों  में
शिखरों में सूरजअस्त हुआ गढवाल में भैजी मस्त हुआ

नीचे   से   दारू   ढोते    हैं   उत्पात  यहाॅं  पर  होते  हैं
खडा  कौन   है   पाॅंओं  पर  घर  बार   लगा  है दाॅंव पर
आज  हिमालय लुटता है  घर - घर  में रिस्ता  टुटता है
ये   देव  भूमि  की  लीला है यहाॅं लाल खून भी पीला है

घर  से  ही  माल  उठाता  है  व्यापारी  खूब  कमाता है
यहाॅं  हर  देश  का  मानव  है ये देव भूमि अब दानव है
संस्कार  गये  अब  पानी  में  ये  बूढी  कौम जवानी में
नेता में  देखो  लाली  है बस,  उत्तराखण्ड  ही  खाली है

राज्य  लूटकर  चन्दा  भी दिल्ली  के  दल  में  जाता है
उत्तराखण्ड  को  राजनीति का  मरा  भूत  भी  खाता है
क्यों   होते   हैं  रोज   फैसले  राजनीति   गलियारों से
मुख्यमंत्री   बदल    रहे    है   दिल्ली   के   दरबारों से

भीख  माॅंगकर  उत्तराखण्ड  को  स्वीटजरलैंड  बनायेंगे
स्विस  बैंक   के  सारे  खाते  उत्तरारखण्ड   में  आयेंगें
सपने   देखो    अपने   देखो   राजनीति   ये  गाती  है
अब  तो  टुच्चेपन के भाशण से  भी  जनता शर्माती है

सबसे  ज्यादा   उत्तराखण्ड  में   रामदेव  की  धरती है
योग - पीठ   गलियारे   में   सरकारें  पानी   भरती हैं
सारे  आसन  राजनिति   के   टी 0 वी0   दिखलाते है
सत्ता   और   सियासत   की   कपाल  भारती  गाते है

अन्तर्राष्ट्रीय   सभी   भिखारी  उत्तराखण्ड   में  रहते हैं
य़े सभी निशाचर उत्तराखण्ड को देव-भूमि  भी कहते हैं
अय्यासी  के  महल  बने  हैं,  पर्वत  की  मालाओं पर
ध्यान योग के शिविर में  सर्कस, परदेशी  बालाओं पर

सारे  नेता,  नौकर -  शाही   बाबा   जी  के  चरणो पर
उत्तराखण्ड भी टिका हुआ है,मठ,मन्दिर उपकरणो पर
स्वर्ग-मोक्ष  की  इस  धरती  पर राजनीति लहराती है
मोक्ष-दायिनी माँ  गंगा  भी  अब गीत  इन्ही के गाती।।
              राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
                  मो0 9897399815
       rajendrakikalam.blogspot.com
                     क्रमशः-4 पर

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