उत्तराखण्ड में बाबा के ढाबे
गुल चमन है इनकी बातों में रिस्ता है कितनी जातों में
कहीं नदी वार कहीं नदी पार ये कैसा युद्व अनाथों में
यहाॅं पुरूष घूमते बाडों में नारी है नरक पहाडों में
शिखरों में सूरजअस्त हुआ गढवाल में भैजी मस्त हुआ
नीचे से दारू ढोते हैं उत्पात यहाॅं पर होते हैं
खडा कौन है पाॅंओं पर घर बार लगा है दाॅंव पर
आज हिमालय लुटता है घर - घर में रिस्ता टुटता है
ये देव भूमि की लीला है यहाॅं लाल खून भी पीला है
घर से ही माल उठाता है व्यापारी खूब कमाता है
यहाॅं हर देश का मानव है ये देव भूमि अब दानव है
संस्कार गये अब पानी में ये बूढी कौम जवानी में
नेता में देखो लाली है बस, उत्तराखण्ड ही खाली है
राज्य लूटकर चन्दा भी दिल्ली के दल में जाता है
उत्तराखण्ड को राजनीति का मरा भूत भी खाता है
क्यों होते हैं रोज फैसले राजनीति गलियारों से
मुख्यमंत्री बदल रहे है दिल्ली के दरबारों से
भीख माॅंगकर उत्तराखण्ड को स्वीटजरलैंड बनायेंगे
स्विस बैंक के सारे खाते उत्तरारखण्ड में आयेंगें
सपने देखो अपने देखो राजनीति ये गाती है
अब तो टुच्चेपन के भाशण से भी जनता शर्माती है
सबसे ज्यादा उत्तराखण्ड में रामदेव की धरती है
योग - पीठ गलियारे में सरकारें पानी भरती हैं
सारे आसन राजनिति के टी 0 वी0 दिखलाते है
सत्ता और सियासत की कपाल भारती गाते है
अन्तर्राष्ट्रीय सभी भिखारी उत्तराखण्ड में रहते हैं
य़े सभी निशाचर उत्तराखण्ड को देव-भूमि भी कहते हैं
अय्यासी के महल बने हैं, पर्वत की मालाओं पर
ध्यान योग के शिविर में सर्कस, परदेशी बालाओं पर
सारे नेता, नौकर - शाही बाबा जी के चरणो पर
उत्तराखण्ड भी टिका हुआ है,मठ,मन्दिर उपकरणो पर
स्वर्ग-मोक्ष की इस धरती पर राजनीति लहराती है
मोक्ष-दायिनी माँ गंगा भी अब गीत इन्ही के गाती।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
क्रमशः-4 पर
गुल चमन है इनकी बातों में रिस्ता है कितनी जातों में
कहीं नदी वार कहीं नदी पार ये कैसा युद्व अनाथों में
यहाॅं पुरूष घूमते बाडों में नारी है नरक पहाडों में
शिखरों में सूरजअस्त हुआ गढवाल में भैजी मस्त हुआ
नीचे से दारू ढोते हैं उत्पात यहाॅं पर होते हैं
खडा कौन है पाॅंओं पर घर बार लगा है दाॅंव पर
आज हिमालय लुटता है घर - घर में रिस्ता टुटता है
ये देव भूमि की लीला है यहाॅं लाल खून भी पीला है
घर से ही माल उठाता है व्यापारी खूब कमाता है
यहाॅं हर देश का मानव है ये देव भूमि अब दानव है
संस्कार गये अब पानी में ये बूढी कौम जवानी में
नेता में देखो लाली है बस, उत्तराखण्ड ही खाली है
राज्य लूटकर चन्दा भी दिल्ली के दल में जाता है
उत्तराखण्ड को राजनीति का मरा भूत भी खाता है
क्यों होते हैं रोज फैसले राजनीति गलियारों से
मुख्यमंत्री बदल रहे है दिल्ली के दरबारों से
भीख माॅंगकर उत्तराखण्ड को स्वीटजरलैंड बनायेंगे
स्विस बैंक के सारे खाते उत्तरारखण्ड में आयेंगें
सपने देखो अपने देखो राजनीति ये गाती है
अब तो टुच्चेपन के भाशण से भी जनता शर्माती है
सबसे ज्यादा उत्तराखण्ड में रामदेव की धरती है
योग - पीठ गलियारे में सरकारें पानी भरती हैं
सारे आसन राजनिति के टी 0 वी0 दिखलाते है
सत्ता और सियासत की कपाल भारती गाते है
अन्तर्राष्ट्रीय सभी भिखारी उत्तराखण्ड में रहते हैं
य़े सभी निशाचर उत्तराखण्ड को देव-भूमि भी कहते हैं
अय्यासी के महल बने हैं, पर्वत की मालाओं पर
ध्यान योग के शिविर में सर्कस, परदेशी बालाओं पर
सारे नेता, नौकर - शाही बाबा जी के चरणो पर
उत्तराखण्ड भी टिका हुआ है,मठ,मन्दिर उपकरणो पर
स्वर्ग-मोक्ष की इस धरती पर राजनीति लहराती है
मोक्ष-दायिनी माँ गंगा भी अब गीत इन्ही के गाती।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
क्रमशः-4 पर
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