न्याय में अन्याय
न्यायालयों की आड में कानून गिरता जा रहा है
राजनितिक भेष में मुजरिम शिखर को पा रहा है
खूनी खडा है सामने जज पूछता है कौन है?
मजबूर है कानून देखो , बिन गवाह के मौन है
नकली गवाह मौजूद है अब हर मुवक्किल के लिये
क्यों जल रहा है,न्याय का मन्दिर गुनाहो के लिये
अब तो पेशी में भी पैसा पेशकारी माॅंगता हेै
बे-गुनाह को किस तरह ये न्याय शूली टाॅंगता है
फैसला , फर्जी बशीयत का अदालत दे रही है
मैं नही तहसील की ये फर्द हमसे कह रही हेै
पीढीयाॅं मर - खप गयीं है ,आस में विस्वास में
मुर्दा खडा है कचहरी में ,न्याय की तालाश में
सलमान खान की पैरवी में दण्ड पर भी बेल है
सम्पन्नता का आशियाना वन गयी अब जेल है
इस न्याय में कीडे ,मकौडे मर रहे बे - भाव से
चूनाव गुण्डे लड रहे हैं, अब देख लो उन्नाव से
धन पास होना चाहिये, कानून बिकने को खडे हैं
कचहरी में भी दलालों, और वकीलों के धडे हैं
पैरवी होती दबंगों की खुली सब कह रही है
सब दलीलें कचहरी की नालियों में बह रही हैं
खूनी, गुण्डे, माफिया अब जमानतों में घूमते हैं
दाउद, मवाली सरगना खुले सडक पर झूमतें हैं
कानून ही अन्धा खडा है, देखता अब कौन है
मंहगे वकीलों की जिरह से,जज बेचारा मौन है
वकील तो हर भ्रष्टता की बात को भी जानते है
कब कहां कैसे हुआ बारीकियों को छानते हैं
झूठ में और सत्य में क्या फर्क है पहचानते हैं
पालकर अन्याय को ये कैसे सीना तानते है
न्याय तो मजबूर है बन्द आंख है बस सुन रहा है
तर्क बे सिर पैर के ना जाने कैसे गुन रहा है
अन्त में सच्चाई की ही मौत हेाती जायेगी
एेसी व्यवस्था देश में आतंक ही फैलायेगी
गीता भरोसा बन गया न्याय में ईमान का
घनश्याम भी है बे-खबर क्या हश्र है ईन्सान का
न्याय में गीता भरोसा , आदमी सच बोलता है
देेखो तराजू न्याय का अन्याय कैसे तोलता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
न्यायालयों की आड में कानून गिरता जा रहा है
राजनितिक भेष में मुजरिम शिखर को पा रहा है
खूनी खडा है सामने जज पूछता है कौन है?
मजबूर है कानून देखो , बिन गवाह के मौन है
नकली गवाह मौजूद है अब हर मुवक्किल के लिये
क्यों जल रहा है,न्याय का मन्दिर गुनाहो के लिये
अब तो पेशी में भी पैसा पेशकारी माॅंगता हेै
बे-गुनाह को किस तरह ये न्याय शूली टाॅंगता है
फैसला , फर्जी बशीयत का अदालत दे रही है
मैं नही तहसील की ये फर्द हमसे कह रही हेै
पीढीयाॅं मर - खप गयीं है ,आस में विस्वास में
मुर्दा खडा है कचहरी में ,न्याय की तालाश में
सलमान खान की पैरवी में दण्ड पर भी बेल है
सम्पन्नता का आशियाना वन गयी अब जेल है
इस न्याय में कीडे ,मकौडे मर रहे बे - भाव से
चूनाव गुण्डे लड रहे हैं, अब देख लो उन्नाव से
धन पास होना चाहिये, कानून बिकने को खडे हैं
कचहरी में भी दलालों, और वकीलों के धडे हैं
पैरवी होती दबंगों की खुली सब कह रही है
सब दलीलें कचहरी की नालियों में बह रही हैं
खूनी, गुण्डे, माफिया अब जमानतों में घूमते हैं
दाउद, मवाली सरगना खुले सडक पर झूमतें हैं
कानून ही अन्धा खडा है, देखता अब कौन है
मंहगे वकीलों की जिरह से,जज बेचारा मौन है
वकील तो हर भ्रष्टता की बात को भी जानते है
कब कहां कैसे हुआ बारीकियों को छानते हैं
झूठ में और सत्य में क्या फर्क है पहचानते हैं
पालकर अन्याय को ये कैसे सीना तानते है
न्याय तो मजबूर है बन्द आंख है बस सुन रहा है
तर्क बे सिर पैर के ना जाने कैसे गुन रहा है
अन्त में सच्चाई की ही मौत हेाती जायेगी
एेसी व्यवस्था देश में आतंक ही फैलायेगी
गीता भरोसा बन गया न्याय में ईमान का
घनश्याम भी है बे-खबर क्या हश्र है ईन्सान का
न्याय में गीता भरोसा , आदमी सच बोलता है
देेखो तराजू न्याय का अन्याय कैसे तोलता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
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