Saturday, May 30, 2015

         पद में-कद में-हद में-मद में
बे - बाक  खडी  है  सास बहु  की तैयारी में
बहुत  मजा  है  राजनीति  की  इस यारी मे
बडो - बडो  के  जीवन अनुभव  फेल हो गये
हम समझे थे साण्ड जिन्हे,सब बैल हो गये

सास  बनो  या  बहू,  खुले आँगन  में डोलो
झेप  मिटानी  हो  तो  बस,   अंग्रेजी  बाेलो
सभी  रोग   सुन्दर  शब्दो  से  दब  जाते है
श्रृंगार रसों  के  गीत  सियासी  सब गाते हैं

महत्वपूर्ण  पद में भी  नारी कद में भारी है
इस राजनीति में  नारी   सबकी  लाचारी है
अब  हारे  हुये  जूँवारी   सट्टा   लूट  रहे है
ये सारे  अजगर  माल  श्वांस  से घूट रहे है

तर्को  और   कूतर्को  से   सासन  चलता है
भारत   में   तो  नेता   शब्दो  से  पलता है
अब रिक्शा मन्त्री   भी   शिक्षा मत्री होते हेै
सौन्दर्य प्रसाधन, मानव   संसाधन ढोते है

इलाहबाद  का  वंश,  कभी   अमरूद रहा है
ब्रह्मचारी  बछडा  राहुल  भी  तो कूद रहा हेै
तुम हारी हो  फिर भी भारत  शान  रही हो
बच्चे को भी  वयस्क अभी से मान रही हो

इस  राजनीति  में  नंगा  होना ही पडता है
विपक्ष  वही  हैे ,अन्दर, बाहर जो लडता है
ये शब्द दंश  के सत्ता में क्यों  झेल रही हो
अब नेता  होकर भी बच्चो से खेल रही हो

जितना  ज्यादा   बोलोगे  उतना   झेलोगे
कब  तक  राजनीति  को शब्दो  से ठेलोगे
जब नारी मौन रहे समझो  भारत माता हेै
कवि आग तो मस्ती में  सब कुछ गाता है।।
      राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
           मो09897399815
   rajendrakikalam.blogspot.com

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