Thursday, April 7, 2016

नेता पानी फेर रहा है
राम भक्त भगवान भरोसे,ये जनता किस-किस को कोसे
सब नेता मस्ती काट रहे हैं, लाश कृषक की बांट रहे हैं
हम प्यासे मोहताज खडे हैं, नेता के अल्फाज बडे हैं
कफन में मुर्दे पडे सडे हैं,राजनीति के अलग घडे हेैं

क्रिकेट खेलो प्यास बुझाओ,भारत माता की जय गाओ
कई करोड के छक्के मारो,हम प्यासे हैं तुम जीतो,हारो
आई.पी.एल. को पता नही है,बडे लोग हैं खता नही है
क्रिकेट में भगवान बहुत हैं,अहंकार,सम्मान बहुत है

अब चुनाव की तैयारी है ,नेता का सत्ता प्यारी है
सब चुनाव में अस्त-व्यस्त है,प्रजातन्त्र है सभी मस्त है
भाषण में पानी बहता है, नेता देखो क्या कहता है
बिजली, पानी, डाम बनेगे, जनता झण्डूबाम बनेगे

योगी धन्धा चला रहा है, भोगी बन्दा जला रहा है
आर्ट लीविंग अब कंहा कौन है,बाबा,ढाबा सभी मौन है
भीख मांग कर खाने वाले, सभी विरक्ती हमने पाले
राजनीति में भोैंक रहे हैं, अहिसुष्णता छौंक रहे हैं

संस्थाओ का पता नही है, सेवा करना खता नही है
राधास्वमी, निरंकार है, अब साई सेवक लाचार हैं
धर्म,मजहब में कहा प्यार है, सम्प्रदाय के जुडे तार हैं
मुशलमान भी तार-तार है,सिक्ख, ईसाइ में दरार है

अब पूरा भारत टूट रहा है,धर्म,- धर्म से छूट रहा है
बन्दा - बन्दा काट रहा है ,पानी सबको बांट रहा है
टी.वी. चैनल चिल्लाते हैें, सब अपनी-अपनी गाते हैं
जो जितने पेसे देता है, चैनल में वो अभिनेता है

सोने की चिडिया का भारत आज प्यास से हाँप रहा है
मुर्दो के अस्ति-पञ्जर से कफन शवों में कांप रहा है
जल की हा-हा कार मची है,जीवन की ही आस बची है
मुर्दो ने जेहाद रची है,इस राजनीति को खूब जंची है

डेढ अरब की आबादी है, घर-घर में देखो शादी है
काम- वाशना शहजादी है, मुर्दे फिर भी परमादी हैं
कौम कबीलो,बस्ती वालों, अपने को संयम में ढालो
इतने कीडे मत पनपाओ, केवल एक शिशु घर लाओ

जीवन सुन्दर बन जायेगा,राष्ट्र गीत जन-जन गायेगा
भीड रोकना ही बस,हल है,भारत में तो जल ही जल हेै
जिले,प्रान्त के झगडे छोडो,पानी को घर-घर में मोडो
आशा, भांषा, भाव, भंगिमा से केवल मानवता जोडो

हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई,कुछ तो समझो मेरे भाई
अहिसुष्ण क्यों पनपाते हो,कीडे बनकर क्यों खाते हो
अभी तो पानी ही संकट है, आगे जीवन ही कंकट है
कवि आग की मानो भाई, पानी ने ही कविता गायी।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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