विक्लांग उत्तराखण्ड
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
मूल निवासी आज यंहा अभिशाप हो गये
अब मेरा जूता, मेरे सिर पर मार रहे हैं
जब से उत्तराखण्ड बना ये भार रहे हैं
हम पञ्चायत के मोहरे ,ये खाप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
बीडी ,सिगरेट मांग-मांग कर पीने वाले
जिस घर में भी जांये,रोटी मांग के खालें
कोदा, मंडवा खाने को मोहताज पडे थे
लावारिस थे, पहाडों पर चुपचाप खडे थे
कू-कर्मी अब देव-भूमि के पाप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
नाली,मुट्ठी पास नही थी, भूमि हीन थे
फटे, पुराने ,टल्ली, झगुले भी महीन थे
अब टैरीकोट है ,जींस , सपारी सूट बूट है
उत्तराखण्ड में डाका डालो, खुली छूट है
हम इज्जत को तरस रहे,ये आप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
अब राज्यसभा के मुर्दे भी हम ही ढोयेंगे
फसल काट कर ये खायेंगे, हम बोयेंगे
बोटबैंक लायसेन्स लूट का इन्हे मिलेगा
कांग्रेस कंही बी.जे.पी का कमल खिलेगा
अब इनकी ही माला फेरो,ये जाप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
ठाकुर, पण्डित, वैश्य, शुद्र की ठेकेदारी
सब टिहरी, पौडी और कुमैय्ये हैं घरबरी
अब देशी और पहाडी का भी भेद भरा है
निशाचरों ने देव - भूमि को सदा चरा है
राज्य बना,पर ये कैसे सन्ताप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये
हम अनाथ हैं, नेता ही असली मालिक हैं
उत्तराखण्ड की ये लावारिस ही कालिख है
आठ बाप सोलह सालों मैं हमने झेले
इस बीहड में सारे डाकू खुलकर खेले
अब कवि आग के शोले भी उत्ताप हो गये
ये लावारिस उत्तराखण्ड के बाप हो गये।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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