अगर ध्यान से पढोगे तो ही समझ आयेगी
धर्म संकट
बाबा ने अवतार लिया है, मैं कहता हूं सब कुछ बेचो
पातञ्जलि आदर्श ऋषि है उसको सडको पर ना खैंचो
आटा,चावल ,मिर्च, मशाला पातञ्जलि से बिकवाओगे
साबून, सर्फ, सौन्दर्य प्रसाधन ,पातञ्जलि से करवाओगे
वेद,शास्त्र,उपनिषद, ऋषि को, कहा रसातल में डालोगे
विज्ञापन, उद्योग जगत से, क्या आदर्शों को पालोगे
क्यों भारत की गुप्त धरोहर, विज्ञापन में नचा रहे हो
क्यों बाबा व्यवसायी दुनिया, धर्म पन्थ से सजा रहे हो
रामदेव हो, बालकृष्ण हो,सब में अपना नाम चलाओ
हर गली,मुहल्ले, चौराहों में उद्योगो की हाट लगाओ
प्रतिष्प्रधा में सबको रगडो,हम पर कुछ एहसान नही है
पर बाप को सडक में बेचो,ये वो हिन्दुस्तान नही है
पातञ्जलि के योग शास्त्र से, कंही किसी को बैर नही है
आयुर्वेद भी अपना ही है, इसमें कुछ भी गैर नही है
पर हेमा के बिस्कुट, मैगी, ये ऋषियों का काम नही है
पातञ्जलि का व्यवसायी दुनिया में कुछ अन्जाम नही है
धर्म-मोक्ष को अर्थ-काम के आयामो से ढकना छोडो
वेद-शास्त्र की मर्यादाएं अन्तर दिव्य ,दृष्टि से जोडो
अर्थशास्त्र की दुनिया में भी दिशा,धर्म से भटक रही है
क्यो पातञ्जलि के उल्टे,सीधे उद्योगो मे लटक रही है
नये-नये निर्माण नियन्त्रित, पातञ्जलि के फलैट बिकेगे
पातञ्जलि के नामो से क्या ,अब बाबा के प्लाट कटेगे
अब भू-माफिया पातञ्जलि के नामो से धरती घेरेंगे
सब चोर,उचक्के पातञ्जलि के नामो की माला फेरेंगे
धर्म-गुरू भी सब मौन खडे हैं, व्यवसायी चौराहों में
रविशंकर की आर्ट लिविंग .उद्योग जगत की बांहो में
क्या अपने भगवान, ऋषि, मुनि, धर्म,ग्रन्थ लावारिस हैं
इस कलियुग में कालनिमी बाबा ही इनके वारिस हैं
जो कुछ भी करना है बाबा, केवल अपना नाम चलाओ
आध्यात्म जगत को,संसारो के चौराहो में ना चमकाओ
पातञजलि को व्यवसायों से अब कितना और गिराओगे
कवि आग इस ना समझी से खुद ही मुह की खाओगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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