Monday, April 18, 2016

बाबा का ढाबा
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया
सन्यास,विरक्ती आज गृहस्थी भेष हो गया
आटा, चावल, मिर्च, मशाला, दाले बेचो
पातञ्जलि को जंगल से सडको पर खैंचो
आध्यात्म अब कालनिमी का देश हो गया
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया

हर चैनल सौन्दर्य प्रसाधन दिखा रहा है
श्रृंगार सृजन बाबा जी हमको सिखा रहा हेै
कामुक, कोमल, त्वचा, लंगोटी बांट रही है
आज साधना काम वाशना छांट रही है
ये व्यवसायी आज अवध अवधेश हो गया
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया

दो वर्ष पुरानी बासमती घर-घर में लाओ
कच्ची घानी के तेलों से पकवान बनाओ
अष्टांग योग में ये उत्पादक उपयोगी है
अब बबा का उद्योग, योग ही विनियोगी हेै
गंजो के सिर में तेल मला तो केश हो गया
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया

निसन्तान गृहस्थी में भी आश जगायी
किरण आस की बंजर धरती में पहुंचायी
सभी नपुंसक बाबा जी की औषध खाओ
पञ्च तत्व निर्जीव पडे हैं उन्हे जगाओ
उद्योग जगत में बाबा अब दरवेश हो गया
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया

आधा भारत बिन पानी के तरस रहा है
बाबा के घर धन - वैभव ही बरस रहा है
योग चित्तवृत्ति निरोध व्यवस्था बता रहा है
बाबाओं को काम - चाम का सता रहा है
कवि आग अब धर्म,धरा में क्लेष हो गया
अब बाथरूम में बाबा का प्रवेश हो गया।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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