Saturday, April 23, 2016

नेता की नीलामी
हम बिकने को तैय्यार खडे हैं कोई लेलो
हम खेल खिलौने हैं सत्ता के हमसे खेलो
सब अपनी सरकार बचाओ हम को झेलो
सभी खटारा खींचो, और हमको भी ठेलो

हम भूखे, नंगे, आवारा हैं ,सूत्रधार हैं
हम असली औलाद नही हैं,पुत्र जार हैं
हर बीहड की राजनीति में जुडी तार हैं
चोर, उचक्के हर विरोध में खास यार हैं

बे-बुनियादी ,फिर भी अपने भवन खडे हैं
चोर, डाकुओं के अपने ही अलग धडे हैं
सत्ता और सियासत में हम चिकने घडे हैं
समय-समय के साथ हमारे भाव चढे हैं

अब सत्ता की मजबूरी माया फेंक रही है
हममे भी, वो माल टिकाऊ देख रही है
धन,माया के साथ-साथ पद भी पाते हैं
हम नरभक्षी हैं,लाश वतन की ही खाते हैं

हम कांग्रेस और बी.जे.पी. की मजबूरी हैं
सत्ता और सियासत की हम ही धूरी हैं
सभी सियासी हम पर बोली लगा रहे हैं
राष्ट्रपति सासन को हम ही भगा रहे हैं

प्रजातन्त्र के नंगे हम पर आस लगायें
हम टेढी - मेढी राजनीति के हैं चौपाये
हम जुगाड के लोकतन्त्र में अहं भाग हैं
हम हंस भेष में प्रजातन्त्र के जगे काग हैं

हम अपंग होकर भी सरपट भाग रहे हैं
कफन ओढकर भी मुर्दों में जाग रहे हैं
हम महारोग हैं,प्रजातन्त्र हम ही खायेंगे
कवि आग भी हम पर ही कविता गायेंगे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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