बिन पानी सब सून
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
सूखी पिच पर घास उगाओ पानी पेलो
क्यों पानी और जवानी सत्ता चाट रही हेै
भाषण से ही घर - घर पानी बांट रही है
भारत माता की जय बोलो सब कुछ झेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
आघा भारत मदिरा में जल डाल रहा है
आघा भारत घर - घर मच्छी पाल रहा है
होटल में भी अय्यासी के स्वीमिंग पुल हेैं
नौ राज्य ही बिन पानी के क्यों व्याकुल हैं
राम राज्य हेै विसलरी की बोतल लेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
अधिनायक अपने वेतन - भत्ते बढा रहे हैं
सब धोती और लंगोटे भारत सढा रहे हैं
उद्योगपति नंगो की चमडी काट रहे हैं
जाति, पांति और कौम कबीले बांट रहे हैं
इनके मुंह में घास की रोटी मिलकर ठेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
यमुना तट पर बाबा जी का कैम्प लगा था
आर्ट लीविंग से यौवनता का भाग्य जगा था
भारत में क्यों बाबा पानी फेर रहे हैं
मैं लिखता हूँ मुझको सारे घेर रहे हैं
कुछ तो शर्म करो बाबा के चेली,चेलों
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
पानी छोडो , योग करो ये समाधान है
कपाल भारती ,आसन, सासन यही ज्ञान है
ये भूखे - प्यासे उपवाशी अच्छे योगी हैं
शास्त्र उठाओ लक्षण से ये ही जोगी हैं
बाबा जी इस नंगे तन पर रोटी बेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
ये सारे बाबा , व्यवसायी संकल्प उठाले
गरीब किसानो के घर जाये उनको पाले
हर नंगे, भूखे, प्यासे को रोटी पहुंचाये
धर्म शास्त्र को पढे - गढें और धर्म निभायें
दया दिखा कर इन गरीब की दुआा भी लेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो
मैं कवि आग हूँ विषय देख कर ही गाता हूँ
मैं दर्द राष्ट्र का छन्दों से ही छलकाता हूँ
सम्भ्रान्त प्रान्त जलनिधि,विधि से बांट रहे हैं
अखण्ड राष्ट्र को पानी से ही काट रहे हैं
कवि आग ये प्रारम्भ है, अब आगे झेलो
नौ प्रान्त सूखे से सड गये क्रिकेट खेलो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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