योग में रोग
जिस भारत का योगी, मैगी, मिर्च, मशाला गाता हेै
आटा, चावल, घी, तेल से बाबा काम चलाता हेै
हेमा से अपने बिस्कुट का विज्ञापन करवाता हेै
भारत माता के चरणो पर लाखो मुण्ड चढाता हेै
पातञ्जलि से अपनी माया की दुनियां चमकाता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै
जो शब्दो के संयम खोकर नियम तोडने आया हो
योग-शास्त्र की क्रियाओं से ,योग -शास्त्र शर्मााया हो
काम,क्रोध,मद, लोभ, मोह से सामराज्य गर्माता हो
अलोम-विलोम से जो भारत की जनता को भर्माता हो
पातञ्जलि को ऐसा साधू अपना गुरू बताता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै
एक लंगोटी राजनीति में गोटी स्वंय बिछाती है
सासन में शव आशन के अध्यासन हमें सीखाती है
हर क्षेत्र में पारंगत होने का दम - खम भरता हो
जिसकी कर्कस - वाणी सुनकरकेवल भारत मरता हो
दुर्भागय है धर्म - गुरू से आज राष्ट्र गर्माता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै
जिस भारत मेें अमछे ,गमछे, चमचे चरण पकडते हों
अहंकार में फंसे गेरूवे, धंस कर खूब अकडते हो
ध्यान,धारणा और समाधी का भी जिनको ज्ञान नही
चित्त,वृत्तियों के फण्डे का जिनको कुछ अनुमान नही
जो आसन के आयामो, व्यायामो को योग बताता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै
योग-शास्त्र से व्यवसायी ने कैसी रीत चलायी है
उद्योगपति का समकक्षी, ये बाबा साढू भाई है
नामी, ग्रामी सभी गेरूवे धन्धा खूब चलाते हैं
धर्म जगत से साधू कम, लाला ही चुन कर आते हैं
जो मानवता में भेद करे क्या राष्ट्र-भक्त कहलाता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै
टाटा, बिडला, डालमिया की प्रतिष्प्रधा में जीने वाले
कलुसित तन,मन,धन के ग्राहक,श्वेताम्बर में ध्ब्बे काले
योग शास्त्र की परिभांषा को अपने हित में मोड रहे हैं
धर्म - शास्त्र, गीता , रामायण को सत्ता से जोड रहे हैं
कवि आग इन बाबाओं से भारत लज्जित हो जाता है
अष्टांग योग के इस बाबा से आज शास्त्र शर्माता हेै।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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