Thursday, April 28, 2016

आग और पानी
पूरे देश में आग लगी है,पानी का आकाल पडा है
जंहा भी देखो नेता साधू, व्यवसायी का जाल खडा है
क्यों भू-माता ब्रिगेड बनी है धर्म - ध्वजा को को
अहिसुष्ण गरीबी घूम रही,मोहताज पडी दाने दाने को
हर चैनल पर बाबा अपने उद्योगो के साथ खडा है
पूरे देश मे आग लगी है, पानी का आकाल पडा है

आगस्ता के उडन खटोलो की संसद में धूम मची है
चोर - चोर मौसेरे भाई, कथा सभी ने एक रची हेै
सब नया सगूफा छोड रहे है , राजनीति गर्माने को
सारे तोते उछल रहे है ,अपनी - अपनी धुन गाने को
संसद तो बीहड है भैय़्या, हर डाकू का अलग धडा है
पूरे देश में आग लगी है, पानी का आकाल पडा है

बाबा तो उद्योग जगत को पनपाने में लगा हुआ है
सभी शक्तियां मौन पडी है, केवल बाबा जगा हुआ है
सुबह-सुबह टी .वी. मे देखे बाबा सब कुछ बेच रहा है
ब्रह्म जगत में जीने वाला कैसे माया खैंच रहा है
ब्रह्म सत्य और झूठी माया, पर बाबा परवान चढा है
पूरे देश में आग लगी है, पानी का आकाल पडा है

हर प्रान्त में अब चूनाव है, केवल नेता भौंक रहे हैं
सुरा,सुन्दरी,धन,बल,माया,आन बान सब झोंक रहे हैं
अपशब्दो के सर्कस में सब,अपने तरकस छोड रहे हैं
झूठी मान, प्रतिष्ठा पाने को सब पागल दौड रहे हैं
जोकर देखो राजनीति में बिन पेंदी का चिकना घडा हेै
पूरे देश में आग लगी है, पानी का आकाल पडा है

शिक्षा भी अब राजनीति में अपने पिल्ले रही है
नेताओ के बीज नर्सरी में चुन-चुन कर डाल रही है
विद्यालय से कृष्ण, कनैह्या, राधा, गोपी ही आयेंगी
रास मण्डली, भजन सियासी, गली ,मुहल्लों में गायेंगी
अब कुरूक्षेत्र के विद्यालय में दोणाचार्य गुरू खडा है
पूरे देश में आग लगी है, पानी का आकाल पडा है

अगल - बगल के सभी पडोसी,अब हमको घूर रहे हैं
ये माल हमारा खाने वाले अब हमको ही चूर रहे है
तिब्बत, नैपाली और बंग्ला भारत मां के पूत हो गये
हिम्मत देखो,जूते खाकर हम शान्ती के दूत हो गये
क्या ये भारत नगर वधू का लावारिस शमशान थडा हेै
पूरे देश में आग लगी है,पानी का आकाल पडा है

कविता लम्बी है पर भारत वालो पढकर आंखे खोलो
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,इसाई छोडो भारत की जय बोलो
टी.वी.चैनल वालों अपनी प्रतिभाओ को आगे लाओ
अहिसुष्णता फैला करके राष्ट्र -भक्ति को ना गर्माओ
कवि आग के हर छन्दो मे ढूंढो तो कोहीनूर गडा है
पूरे देश में आग लगी है,पानी का आकाल पडा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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