Saturday, April 9, 2016

भारत माता की जय
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है
नेता हमको लूट रहे हैं इसका हमको ज्ञान नही है
अहिसुष्णता फैला करके सहिसुष्णता ढूंढ रहे हैं
सात दशक से नेता हमको अपने ढंग से मूंड रहे हैं
हम प्रजातन्त्र की भेडें हैं,बस भेडों को ये भान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है

शिक्षा,दीक्षा, गुरूकुल और मदरसों में झण्डे-डण्डे हेैं
चक्रव्यूह की जड में बैठे राजनीति के मुस्टण्डे हेैं
हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई बोट-बैंक के ये फण्डे हैं
बच्चो ने भी पुस्तक छोडी, हाथ में सबके अब झण्डे हैं
यौवनता की भीडे देखो, भीडों में कुछ जान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है

आज देश में विश्वविद्यालय अपनी संसद खोल रहे हैं
राजनीति के नारे गुरूकुल और मदरसे बोल रहे हैं
शिक्षक भी तो सत्ता मद में कीडे ही तो पनपाते हैें
तोड-जोड की राजनीति से ये भी तो चुनकर आते हैं
आज देश में गुरूओं की भी तो अपनी पहचान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है

सतयुग,त्रेता,द्वापर युग से जो शिक्षा की शान रहा हो
ब्रह्माण्ड भी आर्यखण्ड की जप, तप, दीक्षा मान रहा हो
ब्रह्मा,विष्णु और शंकर भी जिस धरती में डोल रहे हों
राम,कृष्ण,महावीर,बुद्व भी, भारत की जय बोल रहे हों
इस धरती का आज हमारे दिल में भी गुणगान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है

शेखर,सूभाष और भगत सिंह तो अभी हाल में आये थे
इस भारत ने राजगुरू,बिसमिल,हमीद भी तो जाये थे
गाँधी,नहरू और पटेल ने क्या कुछ कम सपने संजोये
लाखों राष्ट्र-भक्त भारत ने, स्वाभिमान पर अपने खोये
शब्दो के बस,सरतरकस हैं चारू, चाप, सन्धान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है

उसी राष्ट्र में राजनीति के दल,दल-दल ही तो फैलाते हैं
पानी को मोहताज वतन है, नेता बिरियानी खाते हैं
मंहगायी , भुखमरी, गरीबी, सुरसा जैसी फैल रही है
राजनीति मुर्दो के शव से कफन खोल कर खेल रही हेै
कवि आग अब राष्ट्र-भक्ति के गीतों में सुर-तान नही है
भारत माता की जय बोलो भारत का अनुमान नही है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
  मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com 

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