Thursday, July 2, 2015

                    कानून-पथ
अब मेरी  मानले  घर में आजा  मोदी भैय्या
तू  ही  पार  लगायेगा   व्यभिचार   की नैया
आदर्श-वाद  को  तू  ही नंगा  कर   सकता है
चरित्रवान   से  तू   ही  पंगा  कर  सकता है

किस-किस ने कब कितना  खाया,तू बोलेगा
भारत  की  औकात  सियासी   तू   खोलेगा
इन चोर, डाकुओं  के  बीहड  में  कंहा धडे हैं
जज,मुजरिम,अधिवक्ता किसके साथ खडे हैं

किस  देवी  के  साथ  कंहा  पर  रास रचायी
किस  देवी  ने  कंहा  तुम्हारी  जान  बचायी
इस बहुमुल्य हीरे को,किस किस ने पहचाना
इस हीरे  ने किस - किस  को  डाला  है दाना

हर मुजरिम अब घर  आने  की  सोच रहा हेै
कानून  हमारा  गुनाह  सभी के   पोंछ रहा है
बडे - बडे    अधिवक्ता    सीना    तान  रहे है
अपराध  भ्रष्ट  के , संविधान  में छान  रहे हेै

समय आ गया  आत्म सर्मपण कर  दे भाई
सलमान  खान  की  देखा  कैसे   बेल कराई
कानूनो   के  जोड - तोड  के  सब   माहिर है
गुण्डों  की   रक्षा   होती   है ,जग - जाहिर है

अधिवक्ता, जज, गवाह  सभी   तैयार खडे हैं
लोकसभा  और राज्य सभा के अलग  धडे हेैं
कानूनो  में  परिवर्तन   भी   हो  ही  जाता हेै
इस  राजनीति   में   भ्रष्टाचारी   ही  आता है

तू  छंटा-छंटाया   व्यभिचारी,  माया  धारी है
आई.पी.एल  में  तेरे  किस्से  जग   जारी है
नर - नारी  किरदार, तुझे सब   मान  रहे हैं
तेरी महफिल में अय्यासी के गुणगान रहे हैं

चूनाव जेल  के अन्दर  से भी  लड सकता हेै
ये  प्रजातन्त्र  है, उपर  भी  तू चढ सकता है
बोट - बैंक   की   राजनीति  हैे   माया  बाँटो
इस प्रजातन्त्र  में  चोर  उचक्के   नेता छांटो

वशुन्धरा,जेतली,सुषमा  तीनों  शान्त खडे हैं
अब पी.एम मोदी असमंजस  में भ्रान्त पडे है
प्रियंका,सोनिया,ऱाहुल,शुक्ला गम झेल रहे हैं
चैनल  में  तोते, बस  मोदी-मोदी  खेल रहे हैं

अब  कानूनो  से भारत की इज्जत खोती हेै
आज  कचहरी  अधिवक्ता, जज  से  रोती हेै
गुनाहगार,सर चढा  है  खुलकर बोल रहा है
कवि आग   ये   मोदी  सबको  खोल रहा हेै।।
          राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
               मो0 9897399815
    rajendrakikalam.blogspot.com  

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