कानूनो के कान में ठोक जिरह की कील
हत्या करदे सत्य की उसका नाम वकील
उलझे धागे
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कोई कहता है फांसी दो, कोई कहता माफ करो
सभी मुकदमे बिगड रहे हैं बुनियादो की कमजोरी से
मिल जाते हैं अधिवक्ता जज, मुजरिम, चोरी -चोरी से
कानून यंहा पर अन्धा है पर तुम तो कुछ इन्साफ करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कौम, कबीले ,सम्प्रदाय, मजहब में आग लगाओगे
सबके अपने-अपने स्वर हेै, किसको न्याय दिलाओगे
एक उबेसी संविधान की छााती में ही नाच रहा है
चौराहो पर कानूनो के पन्ने लेकर बाँच रहा है
न्यायालय बेकार हो गये, पञ्चायत और,खाप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
राष्ट्रपति को वाणी - भूषण बुद्वि - बल्लभ पटा रहे हेैं
संविधान की क्षमा - याचना से औकातें घटा रहे हैं
भारत का कानून तो केवल हम गरीब से खेल रहा है
आज यातना, मध्य-वर्ग और, भूखा ,नंगा झेल रहा है
कनूनो में वर्ग - भेद की सोच समझ कर नाप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
अधिवक्ता तो धन के खातिर,अन्यायों के साथ खडा हेै
न्यायालय में गवाह दलालो के जमघट का अलग धडा है
नई उम्र के जजों की सीटें हर पीठो में विद्यमान है
न्यायालय में जिरह-विरह के चीर हरण का घमासान है
न्यायाधीश की न्याय व्यवस्था, देखो, पश्चाताप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कारागृह में फाँसी वाले बिना मौत के मरे पडे हैं
ईद के बकीरों जैसे कैदी ,हर जेलों में भरे पडे हैं
सब ईश्वर से राष्ट्रपति की क्षमा - याचना मांग रहे हैं
राष्ट्रपति भी आठ छोड कर दो को फाँसी टांग रहे हैं
अब राष्ट्रपति ही न्यायाधीश है,उनसे ही सन्ताप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
दुःख होता है संविधान के पृष्ठ, धृष्ट को छांट रहे हैं
भारत के कानून न्याय को अन्यायों मे बाट रहे है
अवधेश फंसा है अपने घर में, कानूनो ही हाथों से
हिन्दू, मुस्लिम मजा ले रहे, कानूनी जज्बातों से
कवि आग कहता है, न्यायालय में ना ये पाप करो
अरे वकीलो ,न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
हत्या करदे सत्य की उसका नाम वकील
उलझे धागे
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कोई कहता है फांसी दो, कोई कहता माफ करो
सभी मुकदमे बिगड रहे हैं बुनियादो की कमजोरी से
मिल जाते हैं अधिवक्ता जज, मुजरिम, चोरी -चोरी से
कानून यंहा पर अन्धा है पर तुम तो कुछ इन्साफ करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कौम, कबीले ,सम्प्रदाय, मजहब में आग लगाओगे
सबके अपने-अपने स्वर हेै, किसको न्याय दिलाओगे
एक उबेसी संविधान की छााती में ही नाच रहा है
चौराहो पर कानूनो के पन्ने लेकर बाँच रहा है
न्यायालय बेकार हो गये, पञ्चायत और,खाप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
राष्ट्रपति को वाणी - भूषण बुद्वि - बल्लभ पटा रहे हेैं
संविधान की क्षमा - याचना से औकातें घटा रहे हैं
भारत का कानून तो केवल हम गरीब से खेल रहा है
आज यातना, मध्य-वर्ग और, भूखा ,नंगा झेल रहा है
कनूनो में वर्ग - भेद की सोच समझ कर नाप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
अधिवक्ता तो धन के खातिर,अन्यायों के साथ खडा हेै
न्यायालय में गवाह दलालो के जमघट का अलग धडा है
नई उम्र के जजों की सीटें हर पीठो में विद्यमान है
न्यायालय में जिरह-विरह के चीर हरण का घमासान है
न्यायाधीश की न्याय व्यवस्था, देखो, पश्चाताप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
कारागृह में फाँसी वाले बिना मौत के मरे पडे हैं
ईद के बकीरों जैसे कैदी ,हर जेलों में भरे पडे हैं
सब ईश्वर से राष्ट्रपति की क्षमा - याचना मांग रहे हैं
राष्ट्रपति भी आठ छोड कर दो को फाँसी टांग रहे हैं
अब राष्ट्रपति ही न्यायाधीश है,उनसे ही सन्ताप करो
अरे वकीलो, न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो
दुःख होता है संविधान के पृष्ठ, धृष्ट को छांट रहे हैं
भारत के कानून न्याय को अन्यायों मे बाट रहे है
अवधेश फंसा है अपने घर में, कानूनो ही हाथों से
हिन्दू, मुस्लिम मजा ले रहे, कानूनी जज्बातों से
कवि आग कहता है, न्यायालय में ना ये पाप करो
अरे वकीलो ,न्यायाधीशों, ये तस्वीरें साफ करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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