Thursday, July 9, 2015

                       देश मे दरवेष
जिन्ना  से  लेकर  नवाज  तक  कितनी  बातें और करोगे
नेहरू  से  लेकर  मोदी  तक  किससे  कितना  और डरोगे
इस भारत के स्वाभिमान को कब तक कितना और चरोगे
सरहद  की  मौतों  सेे  भारत  में  कितने  शमशान भरोगे

कूट नीति  से  तो  भारत  में तो लूट नीति परवान चढी है
नासूरों  को   पनपाने   में   राजनीति  ही   अहम्  कढी है
सरकारें  आती  जाती   हैं   वही   ढाक   के   तीन  पात हेैं
सरहद  पर  सैना  मरती  है  सक्षम  होकर क्यों अनाथ हैं

दुनिया  भर  से  हाथ  मिलाकर राष्ट्रगीत किसका गाआगे
घर  मे  भ्रष्टाचार   व्याप्त   है,  उसको   कैसे  निपटाओगे
सरहद  में  कम , घर  में ज्यादा नागपंञ्चमी मना रहे हैं
सारे  जोकर  राजनीति  में   अपनी   सर्कस  चला  रहे हैं

लंदन  वाला  मोदी  सबके  मूँह   पर   जूते   मार  रहा है
दाउद  इब्राहिम  से  जिसका  जुडा  हुआ  हर  तार  रहा है
रोज  नया  आतंकवाद  तो  हम  घर  में  ही  पाल  रहे हैं
राजनीति  के  विस्फोटों   में   नई   पीढी   को ढाल रहे हैं

व्यापम  के  घोटाले  भारत  की  प्रतिभा को कुचल रहे हैं
जंहा  भी  देखो  अनपढ, भौंदू  नौकर  शाही  उछल रहे हैं
बडे - बडे  नायक,  नालायक  इस  धन्धे  में  फसे पडे हैं
चाल, चरित्र  के  चेहरों  वाले  सब  कीचड  मेें धंसे पडे हैं

राष्ट्र भक्त  आसक्त  बने   अब  राजनीति  में  घूम  रहे हैेंं
सारे  नेता  और    सियासी   सत्ता   मद  में झूम  रहे हैं
एक  दूसरे   के   उपर   सब   दोषा    रोपण  डाल  रहे हैं
जान बूझ  कर  हम  सापों  को  दूध पिलाकर पाल रहे हेै

सात  दशक  के  इस नाटक से सारी जनता पकी हुयी हेै
डेढ अरब  की  जनता  नेताओ को सुन कर थकी हुयी है
नेता खुद भी  भाग  रहा  है  जनमत को भी भगा रहा है
कवि आग तो कविता लिख  कर मुर्दो को ही जगा रहा है।।
              राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
                    मो09897399815
      rajendrakikalam.blogspot.com

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