देश मे दरवेष
जिन्ना से लेकर नवाज तक कितनी बातें और करोगे
नेहरू से लेकर मोदी तक किससे कितना और डरोगे
इस भारत के स्वाभिमान को कब तक कितना और चरोगे
सरहद की मौतों सेे भारत में कितने शमशान भरोगे
कूट नीति से तो भारत में तो लूट नीति परवान चढी है
नासूरों को पनपाने में राजनीति ही अहम् कढी है
सरकारें आती जाती हैं वही ढाक के तीन पात हेैं
सरहद पर सैना मरती है सक्षम होकर क्यों अनाथ हैं
दुनिया भर से हाथ मिलाकर राष्ट्रगीत किसका गाआगे
घर मे भ्रष्टाचार व्याप्त है, उसको कैसे निपटाओगे
सरहद में कम , घर में ज्यादा नागपंञ्चमी मना रहे हैं
सारे जोकर राजनीति में अपनी सर्कस चला रहे हैं
लंदन वाला मोदी सबके मूँह पर जूते मार रहा है
दाउद इब्राहिम से जिसका जुडा हुआ हर तार रहा है
रोज नया आतंकवाद तो हम घर में ही पाल रहे हैं
राजनीति के विस्फोटों में नई पीढी को ढाल रहे हैं
व्यापम के घोटाले भारत की प्रतिभा को कुचल रहे हैं
जंहा भी देखो अनपढ, भौंदू नौकर शाही उछल रहे हैं
बडे - बडे नायक, नालायक इस धन्धे में फसे पडे हैं
चाल, चरित्र के चेहरों वाले सब कीचड मेें धंसे पडे हैं
राष्ट्र भक्त आसक्त बने अब राजनीति में घूम रहे हैेंं
सारे नेता और सियासी सत्ता मद में झूम रहे हैं
एक दूसरे के उपर सब दोषा रोपण डाल रहे हैं
जान बूझ कर हम सापों को दूध पिलाकर पाल रहे हेै
सात दशक के इस नाटक से सारी जनता पकी हुयी हेै
डेढ अरब की जनता नेताओ को सुन कर थकी हुयी है
नेता खुद भी भाग रहा है जनमत को भी भगा रहा है
कवि आग तो कविता लिख कर मुर्दो को ही जगा रहा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
जिन्ना से लेकर नवाज तक कितनी बातें और करोगे
नेहरू से लेकर मोदी तक किससे कितना और डरोगे
इस भारत के स्वाभिमान को कब तक कितना और चरोगे
सरहद की मौतों सेे भारत में कितने शमशान भरोगे
कूट नीति से तो भारत में तो लूट नीति परवान चढी है
नासूरों को पनपाने में राजनीति ही अहम् कढी है
सरकारें आती जाती हैं वही ढाक के तीन पात हेैं
सरहद पर सैना मरती है सक्षम होकर क्यों अनाथ हैं
दुनिया भर से हाथ मिलाकर राष्ट्रगीत किसका गाआगे
घर मे भ्रष्टाचार व्याप्त है, उसको कैसे निपटाओगे
सरहद में कम , घर में ज्यादा नागपंञ्चमी मना रहे हैं
सारे जोकर राजनीति में अपनी सर्कस चला रहे हैं
लंदन वाला मोदी सबके मूँह पर जूते मार रहा है
दाउद इब्राहिम से जिसका जुडा हुआ हर तार रहा है
रोज नया आतंकवाद तो हम घर में ही पाल रहे हैं
राजनीति के विस्फोटों में नई पीढी को ढाल रहे हैं
व्यापम के घोटाले भारत की प्रतिभा को कुचल रहे हैं
जंहा भी देखो अनपढ, भौंदू नौकर शाही उछल रहे हैं
बडे - बडे नायक, नालायक इस धन्धे में फसे पडे हैं
चाल, चरित्र के चेहरों वाले सब कीचड मेें धंसे पडे हैं
राष्ट्र भक्त आसक्त बने अब राजनीति में घूम रहे हैेंं
सारे नेता और सियासी सत्ता मद में झूम रहे हैं
एक दूसरे के उपर सब दोषा रोपण डाल रहे हैं
जान बूझ कर हम सापों को दूध पिलाकर पाल रहे हेै
सात दशक के इस नाटक से सारी जनता पकी हुयी हेै
डेढ अरब की जनता नेताओ को सुन कर थकी हुयी है
नेता खुद भी भाग रहा है जनमत को भी भगा रहा है
कवि आग तो कविता लिख कर मुर्दो को ही जगा रहा है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
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