नेता की नक्कासी
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस ,नेताजी बोलो
एक शब्द काफी है, चौराहों पर पूरी पोल ना खोलो
खादी कुर्ता और पायजामा,मफलर,टोपी,सब कहती है
प्रजातन्त्र में जनता, नेता जी को शदियों से सहती है
फिर चुनाव आने वाले हैं, जाओ जोकर के संग डोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
सडक छाप पर मुहर लगाकर सभी नमूने चूने तूने
बोट माॅगने घर - घर जाकर ये झुनझूने चूने तूने
जिसका कोई ठौर ठिकाना काम,धाम पैगाम नही था
शहर,गाॅव के गली,मुहल्लो में नक्कारा,नाम नही था
अब नंग,मतंगो और मलंगो में भूखा हो उसे टटोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो
भ्रष्टाचार, बलात्कार और व्यभिचार इनका पेशा है
जूते, चप्पल, गाली खाकर शान्त खडा,कैसा भैंसा है
गाॅधी जी के आर्दशों का लालन-पालन करने वालों
उपवाशों के जनवासो में, चौबीस घण्टे चरने वालों
लोकतंत्र की खुली तुला पर भूखी, नंगी जनता तोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेता जी बोलो
भाषण की भी भांषा देखो, रामराज की आशा देखो
दाॅव लगे तो पाशा फेंको, सारा सदन, तमाशा देखो
एक टाॅंग रेलों मे देखो, एक टाॅंग जेलों में देखो
जूॅंआ, सट्टा और अय्यासी, लूटमार खेलों में देखो
हे,कु-कर्मो के बे - शर्मो, मुस्टण्डो के झण्डो झोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
अब तो सडक छाप आवारा जनमत से चुनकर आते है
चाट ,पकोडी बेचने वाले राष्ट्र- ध्वजों को फहराते हैं
रहने को घर-बार नही था, फारम-हाउस की बाते है
राजनीति में हिन्दुस्तानी नेता की कितनी जाते है
प्रजातंत्र के विषमन्थन से,सागर में तो विष ना घोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बष,नेताजी बोलो
रोटी है तो दाल नही है,नेता को कुछ ख्याल नही हेै
मंहगायी मलाल नही है,बिखरे स्वर है ताल नही है
पल-पल में परिधान बदलने से तो भारत शर्माता है
कुछ तो शर्म करा बे-शर्मो, अब नंगी भारत माता है
मां की सेवा में अर्पित हो करके अपने पाप तो धोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
सभी लंगोटे, हाथ में लोटे ,लेकर दिल्ली भाग रहे हैं
ईमाम बुखारी आयत पढकर,मुर्छा से अब जाग रहे हैं
अगडे,पिछडे,झोपड पट्टी, सभी को चारा डाल रहे हैं
भारत माता के बच्चों को सब, भाषण से पाल रहे हैं
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाइ,की अग्नि के ठण्डे शोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस ,नेताजी बोलो
डेढ़ अरब में भूखे - नंगे इनके कारण ही मरतें हैं
नेताओं के धन्धे देखो, धोती कुर्ते क्या करते हैं
सोने की चिडिया का भारत मिट्टी में कैसे मिलता है
संविधान का प्राविधान भी, नेताओ से क्यों हिलता है
कवि‘आग’ के श्रोताओं को क्यों डसते हो सर्प सपोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस,नेताजी बोलो !!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस ,नेताजी बोलो
एक शब्द काफी है, चौराहों पर पूरी पोल ना खोलो
खादी कुर्ता और पायजामा,मफलर,टोपी,सब कहती है
प्रजातन्त्र में जनता, नेता जी को शदियों से सहती है
फिर चुनाव आने वाले हैं, जाओ जोकर के संग डोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
सडक छाप पर मुहर लगाकर सभी नमूने चूने तूने
बोट माॅगने घर - घर जाकर ये झुनझूने चूने तूने
जिसका कोई ठौर ठिकाना काम,धाम पैगाम नही था
शहर,गाॅव के गली,मुहल्लो में नक्कारा,नाम नही था
अब नंग,मतंगो और मलंगो में भूखा हो उसे टटोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो
भ्रष्टाचार, बलात्कार और व्यभिचार इनका पेशा है
जूते, चप्पल, गाली खाकर शान्त खडा,कैसा भैंसा है
गाॅधी जी के आर्दशों का लालन-पालन करने वालों
उपवाशों के जनवासो में, चौबीस घण्टे चरने वालों
लोकतंत्र की खुली तुला पर भूखी, नंगी जनता तोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेता जी बोलो
भाषण की भी भांषा देखो, रामराज की आशा देखो
दाॅव लगे तो पाशा फेंको, सारा सदन, तमाशा देखो
एक टाॅंग रेलों मे देखो, एक टाॅंग जेलों में देखो
जूॅंआ, सट्टा और अय्यासी, लूटमार खेलों में देखो
हे,कु-कर्मो के बे - शर्मो, मुस्टण्डो के झण्डो झोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
अब तो सडक छाप आवारा जनमत से चुनकर आते है
चाट ,पकोडी बेचने वाले राष्ट्र- ध्वजों को फहराते हैं
रहने को घर-बार नही था, फारम-हाउस की बाते है
राजनीति में हिन्दुस्तानी नेता की कितनी जाते है
प्रजातंत्र के विषमन्थन से,सागर में तो विष ना घोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बष,नेताजी बोलो
रोटी है तो दाल नही है,नेता को कुछ ख्याल नही हेै
मंहगायी मलाल नही है,बिखरे स्वर है ताल नही है
पल-पल में परिधान बदलने से तो भारत शर्माता है
कुछ तो शर्म करा बे-शर्मो, अब नंगी भारत माता है
मां की सेवा में अर्पित हो करके अपने पाप तो धोलो
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो
सभी लंगोटे, हाथ में लोटे ,लेकर दिल्ली भाग रहे हैं
ईमाम बुखारी आयत पढकर,मुर्छा से अब जाग रहे हैं
अगडे,पिछडे,झोपड पट्टी, सभी को चारा डाल रहे हैं
भारत माता के बच्चों को सब, भाषण से पाल रहे हैं
हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाइ,की अग्नि के ठण्डे शोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस ,नेताजी बोलो
डेढ़ अरब में भूखे - नंगे इनके कारण ही मरतें हैं
नेताओं के धन्धे देखो, धोती कुर्ते क्या करते हैं
सोने की चिडिया का भारत मिट्टी में कैसे मिलता है
संविधान का प्राविधान भी, नेताओ से क्यों हिलता है
कवि‘आग’ के श्रोताओं को क्यों डसते हो सर्प सपोलों
अगर किसी को गाली देनी हो तो बस,नेताजी बोलो !!
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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