अच्छे दिन
राजनीति मे अच्छे दिन तो राजनीति के ही आते हैं
व्यापारी को छोड के बाकी हम सब तो धक्के खाते हैं
अच्छे दिन की परिभांषा मे वशुन्धरा सुषमा आती है
अरूण जेतली,शरद पवार और शुक्ला की पीढी खाती हैे
दिल्ली , महाराष्ट्र, गुजराती अच्छे दिन ही मान रहे है
यू. पी. ओैर बिहारी, राजस्थानी सीना तान रहे है
उत्तराखण्ड और दक्षिण भारत अच्छे दिन में डोल रहे हेैं
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सब औकातें खोल रहे हैं
कोई प्रान्त बचा है ऐसा जंहा का नेता दीन दुखी है
मध्यवर्ग,मजदूर,किसान को ढूंढ के देखो कंही सुखी हो
राजनीति में जंहा भी देखो नेता की चर्चा जारी है
अच्छे दिन की परिभांषा में नेता जी ही क्यों भारी हेै
अय्यासी में ए.सी गाडी, फार्म - हाउस ,और बंगले हैं
प्रजातन्त्र में भीख मांगने वाले नेता सब कंगले हेै
अरब खरब के विज्ञापन मे देश की माया डाल रहे हैं
पूरे देश में सारे नेता अपने चमचे पाल रहे हैं
जनसंख्या, भुखमरी गरीबी, मंहगायी इनके कारण है
जनता का धन लूट रहे हैं,ये भारत के भव तारण हैं
कनिमोझी, कलमाडी, मोदी को नेता ही पनपाते हेैं
डाकू डाका डाल रहे हैं, नेता जी मिलकर खाते हैं
फर्जी डीग्री के गण नायक, लोकतन्त्र में खास हो गये
जो चूनाव ही हार गये हैं, राष्ट्र - भक्त नक्कास हो गये
पूरातत्व के गड बड बूढे, राज्यपाल , सत्ताधारी हेै
महाभारत के कुरूक्षेत्र में, रक्षक - भक्षक गिरधारी हैं
देश की जनता नेताओ में नैतिकता को झाँक रही है
अलग अलग बीहड के डाकू से भारत को आंक रही है
लोकसभा में आधे सांसद मायावी है अरब पति हेै
फिर भी वेतन लूट रहे है, प्रजातन्त्र के मूढमति है
कुछ तो खुद को नंगा घोषित करके माया लूट रहे हैं
आँख मूद कर ये कंगले भी, अजगर हैं सब घूंट रहे है
राजनीति में अच्छे दिन के कारण ही नेता आते हैं
बूरे दिन में अच्छे दिन की कवि आग कविता गाते हैें।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
राजनीति मे अच्छे दिन तो राजनीति के ही आते हैं
व्यापारी को छोड के बाकी हम सब तो धक्के खाते हैं
अच्छे दिन की परिभांषा मे वशुन्धरा सुषमा आती है
अरूण जेतली,शरद पवार और शुक्ला की पीढी खाती हैे
दिल्ली , महाराष्ट्र, गुजराती अच्छे दिन ही मान रहे है
यू. पी. ओैर बिहारी, राजस्थानी सीना तान रहे है
उत्तराखण्ड और दक्षिण भारत अच्छे दिन में डोल रहे हेैं
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सब औकातें खोल रहे हैं
कोई प्रान्त बचा है ऐसा जंहा का नेता दीन दुखी है
मध्यवर्ग,मजदूर,किसान को ढूंढ के देखो कंही सुखी हो
राजनीति में जंहा भी देखो नेता की चर्चा जारी है
अच्छे दिन की परिभांषा में नेता जी ही क्यों भारी हेै
अय्यासी में ए.सी गाडी, फार्म - हाउस ,और बंगले हैं
प्रजातन्त्र में भीख मांगने वाले नेता सब कंगले हेै
अरब खरब के विज्ञापन मे देश की माया डाल रहे हैं
पूरे देश में सारे नेता अपने चमचे पाल रहे हैं
जनसंख्या, भुखमरी गरीबी, मंहगायी इनके कारण है
जनता का धन लूट रहे हैं,ये भारत के भव तारण हैं
कनिमोझी, कलमाडी, मोदी को नेता ही पनपाते हेैं
डाकू डाका डाल रहे हैं, नेता जी मिलकर खाते हैं
फर्जी डीग्री के गण नायक, लोकतन्त्र में खास हो गये
जो चूनाव ही हार गये हैं, राष्ट्र - भक्त नक्कास हो गये
पूरातत्व के गड बड बूढे, राज्यपाल , सत्ताधारी हेै
महाभारत के कुरूक्षेत्र में, रक्षक - भक्षक गिरधारी हैं
देश की जनता नेताओ में नैतिकता को झाँक रही है
अलग अलग बीहड के डाकू से भारत को आंक रही है
लोकसभा में आधे सांसद मायावी है अरब पति हेै
फिर भी वेतन लूट रहे है, प्रजातन्त्र के मूढमति है
कुछ तो खुद को नंगा घोषित करके माया लूट रहे हैं
आँख मूद कर ये कंगले भी, अजगर हैं सब घूंट रहे है
राजनीति में अच्छे दिन के कारण ही नेता आते हैं
बूरे दिन में अच्छे दिन की कवि आग कविता गाते हैें।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

No comments:
Post a Comment