भूल के शूल
गले मिले और हाथ मिले पर अब तक ना जज्बात मिले
जले भूने इन चेहरों के, बस फुंके हुये दो गात मिले
ये हृदय-शून्य ना गीत बने ,भयभीत कभी ना मीत बने
इस कपट,लपट की अग्नि से,ना फटे दूध नवनीत बने
जितने भी अब तक आये गये सब खेल सियासी खेल गये
बस,वही समस्या पहले थी, जिसको ये आगे ठेल गये
जो-जो भी नुक्ते अपनाये,सब उलझ-उलझ कर टूट गये
ना यार मिला ना प्यार मिला,उलझन के अंकुर फूट गये
कल तक का भारत पाक बना, अपने कर्मो से खाक बना
अब भीख मांगने वालो मे बे -शर्म हया बे - बाक बना
घरबार गया, दरबार गया, दुनिया से कारोबार गया
आतंकवाद के चक्कर में , ये फर्जी इज्जतदार गया
कश्मीर समस्या की गुत्थी बातों से बिगडती जाती हेै
कमजोर पक्ष की कौमे ही बस, गीत सियासी गाती हेै
इसका हल केवल फौजों के हाथों में दिखायी देता हेै
कमजोर सियासत दर्पण है, जिसकी परछायी नेता है
या तो अब, युद्व करो इस पर, या मुर्दों को ही दान करो
बे-मौत मरे इन वीरों का ,कुछ तो सोचो, उत्थान करो
अगल - बगल के मुर्दों को, ये भारत कब तक ढोयेगा
सत्ता के सियासी कीचढ में, भारत कितनो को खोयेगा
बस,बन्द करो ये सममेलन, अब समय चक्र दोहराता हेेै
कुरूबान वतन पर जो होगा, इतिहास उसी को गाता है
भगत सिह, शेखर, सूभाष की कुर्बानी को याद करो
कवि आग की लपटो में,तप कर बस,अब जेहाद करो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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