कलाम को सलाम
हर हिन्दू देश राम बने, महावीर, बुद्व धनश्याम बने
मुशलमान अब्दुल हमीद,या फिर अब्दुल कलाम बने
सिक्ख गुरू गोविन्द बने,गुरूग्रन्थ का नानक नाम बने
इसाई ईस का शीश बने, आशीश बने पैगाम बने
अब्दुल कलाम के जीवन से जीवन की सरिता को देखो
मजहब के कौम,कबीलो में,बहती उस त्वरिता को देखो
अपवाद बना जो भारत में ब्रह्मचर्य अपना करके
मर्मस्थल में मन मानव के जो अमर हुआ हैे मर करके
मिशाईल से मिशाल बना,कवच बना ओैर ढाल बना
वो सपूत भी मरकर के, कैसे भारत का, भाल बना
राष्ट्र भक्ति की परिभाषा उस प्रतिभा से कुछ तो सीखो
राष्ट्र सुरक्षित अभिलाषा उस प्रतिभा से कुछ तो सीखो
जिन बच्चों को सहलाया था उन बच्चों को रोते देखा
राष्ट्र - समर्पित लोगों को लगता है कुछ खोते देखा
जो मरा राष्ट्र की चर्चा में कुछ उसका गौरव गान करो
भेद -भाव को छोडो बस, इस देश को हिन्दुस्तान करो
जिसने कूरान को पी डाला,गीता के भाव को चूस लिया
हर कौम कबीलों की पीडा को हृदय से महसूस किया
कूरान की आयत के कलमे फिर से इजात कलाम करे
कविआग के छन्द,मन्द उस नन्द को शीश सलाम करे।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com

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