जलीलों की दलीले
सियासत ने हमारी कौम को मुर्दा बना डाला
मिलाकर हाथ दुश्मन से किया क्यो अपना मूॅह काला
कब तक दोस्ती करके घर अपना बिगाडोगे
सियासत में सियासत से अब कितना दहाडोगे
जेलों मे पनाह मिलती है हर आतंकवादी को
मुजरिम के लिबासों में तडफती, देख खादी को
यहाॅं फाॅंसी भी रूकती है हूकूमत की अपीलों से
लफंगे बच निकलते है यहाॅं महगे वकीलों से
यहां तो एक ही रोना है बश, बातें ही चलती हेै
हूकूमत जब बदलती है,तो ये हरकत मचलती है
कुचलते हैं सभी आर्दश हमारे कारनामो से
यहाॅं आतंक झडते हैं , नेता के पजामो से
हूकूमत का भरोशा छोड़ कर तैयार होना है
तिरंगे को, सियासत की फिजां से अब ना ढोना है
उठाओ अस्त्र अपने अब ,बस, घुसते चले जाओ
वतन का एक ही फतवा हेै,बस,तुम आग बन जाओ
सपोलों के कपोलों मे कितना दूध डालोगे
इन आतंक की नश्लों को कितना और पालोगे
उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅ आतंक दिखता है
नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है
मेमन की सिफारिस में भी नैतिकता दिखाते हो
भारत में अमन आतंक से होगा , ये गाते हो
अभी पंजाब देखा हेै, अब हिन्दुस्तान बाकी है
मिलाया हाथ दुश्मन से, ये तो एक झांकी है
जरा पूछो उबैसी से दरिन्दे कारनामो को
ये हरकत कौन करता है, पूछो इन पजामो को
गुनाहों से उजडते हैं, क्यों घर बे - गुनाहों के
क्या कीमत लगाओगे , उन बे - दर्द आहों के
अहिंसा छोड़ कर, ताण्डव करो कैलाश बन जाओ
गाॅधी का करो आदर , पर सूभाष को गाओ
यहाॅ संहार करने को खुद अवतार आता है
ये हिसा भी अहिसा है ये मुरलीधर बताता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
rajendrakikalam.blogspot.com
सियासत ने हमारी कौम को मुर्दा बना डाला
मिलाकर हाथ दुश्मन से किया क्यो अपना मूॅह काला
कब तक दोस्ती करके घर अपना बिगाडोगे
सियासत में सियासत से अब कितना दहाडोगे
जेलों मे पनाह मिलती है हर आतंकवादी को
मुजरिम के लिबासों में तडफती, देख खादी को
यहाॅं फाॅंसी भी रूकती है हूकूमत की अपीलों से
लफंगे बच निकलते है यहाॅं महगे वकीलों से
यहां तो एक ही रोना है बश, बातें ही चलती हेै
हूकूमत जब बदलती है,तो ये हरकत मचलती है
कुचलते हैं सभी आर्दश हमारे कारनामो से
यहाॅं आतंक झडते हैं , नेता के पजामो से
हूकूमत का भरोशा छोड़ कर तैयार होना है
तिरंगे को, सियासत की फिजां से अब ना ढोना है
उठाओ अस्त्र अपने अब ,बस, घुसते चले जाओ
वतन का एक ही फतवा हेै,बस,तुम आग बन जाओ
सपोलों के कपोलों मे कितना दूध डालोगे
इन आतंक की नश्लों को कितना और पालोगे
उठाओ अस्त्र अपने अब जहाॅ आतंक दिखता है
नेता को कुचल डालो जो इनका भाग्य लिखता है
मेमन की सिफारिस में भी नैतिकता दिखाते हो
भारत में अमन आतंक से होगा , ये गाते हो
अभी पंजाब देखा हेै, अब हिन्दुस्तान बाकी है
मिलाया हाथ दुश्मन से, ये तो एक झांकी है
जरा पूछो उबैसी से दरिन्दे कारनामो को
ये हरकत कौन करता है, पूछो इन पजामो को
गुनाहों से उजडते हैं, क्यों घर बे - गुनाहों के
क्या कीमत लगाओगे , उन बे - दर्द आहों के
अहिंसा छोड़ कर, ताण्डव करो कैलाश बन जाओ
गाॅधी का करो आदर , पर सूभाष को गाओ
यहाॅ संहार करने को खुद अवतार आता है
ये हिसा भी अहिसा है ये मुरलीधर बताता है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा ;(आग)
मो09897399815
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